भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य शासन ने नियत समय से पहले स्कूल से बच्चों को अवकाश दे दिया। अब गर्मी के अवकाश में बच्चे मस्ती करेंगे, घूमेंगे-फिरेंगे और मोबाईल में समय बीताएंगे। अवकाश का मतलब पढ़ाई से छुट्टी नहीं होता, बल्कि घर में रहकर कुछ घंटे के लिए पढ़ाई का भी होता है। विद्यालय में आज पढ़ाई का बोझ कुछ ज्यादा ही होता है, जिसके कारण 10 माह स्कूल की पढ़ाई, घर का होमवर्क, ऊपर से अभिभावकों के दबाव के कारण दो-तीन घंटे तक ट्यूशन की पढ़ाई…ऊफ! सिर्फ 10 महीने तक पढ़ाई ही पढ़ाई… यहां तक के लिए बच्चों के पास खेलने का समय भी नहीं निकल पाता। इतना स्ट्रैस… विद्यार्थी जीवन के लिए ठीक नहीं। बच्चे पढ़ाई को उत्सव के रूप में लें… ना कि स्टै्रस। विद्यार्थी जीवन का मजा तभी है, जब पढ़ाई के लिए कड़े संघर्षों के साथ-साथ पर्याप्त खेलने का भी वक्त मिले। बच्चे गर्मी की छुट्टी में पूरा समय खेलने में बीता देते हैं और पुस्तक से कोसों दूर चले जाते हैं, यह भी ठीक नहीं।
गर्मी की छुट्टी में मस्ती करें, खेलें, रिश्तेदारों के घर घूमें-फिरें लेकिन वक्त का तकाजा है कि पुस्तक से दूर कभी ना हों। विद्यालयीन पुस्तकों का अध्ययन कुछ घंटे जरूर करें और गर्मी की छुट्टी में समान्य ज्ञान, कौशल विकास, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें अवश्य पढ़ें। मस्तिष्क को तरोजाता करने के लिए मनोरंजक पुस्तकों का अध्ययन करना बेहतर होगा। पुस्तक हमारे सच्चे मित्र होती हैं और सच्चे मित्र का सानिध्य निरंतर जीवन में मिलता रहे, तो जीवन सरल होता है और समस्याओं का समाधान भी मिलता है। पुस्तक हमें सबकुछ सीखाती हैं। जीवन जीने की कला, जीवन में अनुशासन, बड़ों और छोटों के साथ व्यवहार करना, जीवन में सामाजिक कार्यों का महत्व, सेवा का महत्व, परिवार का महत्व… और ना जाने जीवन में क्या-क्या सीखा जाती हैं पुस्तकें। पुस्तकों का साथ… मायने … जीवन में सुख-समृद्धि-सफलता। इति
गर्मी की छुट्टी में भी अध्ययन बंद ना हो
