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एसईजेड इकाइयों से घरेलू क्षेत्र में आए माल का निर्यात होने पर मिलेगा शुल्क रिफंड

नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित इकाइयों से घरेलू क्षेत्र में शुल्क अदा कर भेजे गए माल को बाद में निर्यात किए जाने की स्थिति में ‘आयातित माल’ माना जाएगा और उस पर भी शुल्क वापसी (ड्यूटी ड्रॉबैक) का लाभ मिलेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने सीमा शुल्क अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि एसईजेड इकाइयों से घरेलू शुल्क क्षेत्रों (डीटीए) में शुल्क अदा कर भेजे गए माल को यदि बाद में निर्यात किया जाता है, तो उसे सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 74 के तहत आयातित माल माना जाएगा। 

निर्देश में कहा गया है कि अब तक कुछ क्षेत्रीय कार्यालयों में अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे थे। कुछ जगहों पर एसईजेड से डीटीए में भेजे गए माल को आयात नहीं माना जा रहा था, जिसके कारण ड्यूटी ड्रॉबैक के दावों को अस्वीकार किया जा रहा था। इसी असमानता को दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है। सीबीआईसी ने कहा, “जहां एसईजेड इकाई से डीटीए में माल लागू शुल्कों के भुगतान के बाद भेजा गया हो और बाद में उसका पुनः निर्यात किया जाए, उसे शुल्क रिफंड के लिहाज से आयातित माल माना जाएगा।” इस कदम को शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने ‘स्वागत योग्य और न्यायसंगत’ बताते हुए कहा है कि यह निर्देश विभिन्न सीमा शुल्क कार्यालयों में चल रही अलग-अलग प्रक्रियाओं को समाप्त करेगा और अनावश्यक विवादों को कम करेगा। 

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “इससे निर्यातकों को राहत मिलेगी क्योंकि पहले से शुल्क चुका चुके माल पर दोबारा निर्यात के समय फंसी राशि वापस मिल सकेगी। इससे नकदी प्रवाह बेहतर होगा और व्यापारिक अनिश्चितता कम होगी।” भारतीय निर्यातकों के निकाय ‘फियो’ ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह लंबे समय से लंबित अस्पष्टता को दूर करता है और खासकर एमएसएमई निर्यातकों के लिए राहत लेकर आएगा। फियो ने कहा कि इस प्रावधान के समान और सुचारु क्रियान्वयन से निर्यात प्रक्रिया अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगी तथा व्यापारियों को अधिक निश्चितता मिलेगी। 

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