जांजगीर। जांजगीर-नैला शहर की प्यास बुझाने के लिए हसदेव नदी का पानी घर-घर पहुंचाने का दावा एक बार फिर सुर्खियों में है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने शनिवार को बिरगहनी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण कर नवंबर 2027 तक काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

पिछले डेढ़ दशक में यह योजना तीन बार फेल हो चुकी है और करोड़ों रुपये पानी में बह चुके हैं। पहला फेज (वर्ष 2011-12) में लगभग 21 करोड़ की लागत से योजना शुरू हुई। दावा था कि पाइपलाइन बिछ गई है, लेकिन तकनीकी खराबी और गुणवत्ताहीन पाइपों के कारण ट्रायल के दौरान ही पाइप जगह-जगह से फट गए। योजना ठप हो गई। इसके बाद दूसरा फेज (वर्ष 2017-18) में अमृत मिशन और अन्य मदों से करोड़ों फिर फूंके गए। इंटेक वेल और पाइपलाइन विस्तार का काम हुआ, लेकिन हसदेव नदी से शहर तक पानी लाने का प्रबंधन फेल रहा।
जांजगीर के आधे वार्डों में आज भी पुरानी जर्जर पाइपलाइन से गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। तीसरा फेज (अमृत 2.0) में अब फिर से करोड़ों की नई डीपीआर बनी है। 33.80 लाख लीटर क्षमता के ओवरहेड टैंक बनाने का लक्ष्य है, जिसकी डेडलाइन अब नवंबर 2027 तय की गई है।
