नई दिल्ली,एजेंसी। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEO) ज्ञानेश कुमार सहित इलेक्शन कमीशन के सीनियर अधिकारियों की बुधवार को राज्य चुनाव अधिकारियों के साथ मीटिंग जारी है। इसमें देशभर में वोटर्स लिस्ट के स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) यानी वोटर्स वेरिफिकेशन, कराने की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिहार के बाद, पूरे देश में SIR लागू किया जाएगा। इस साल के अंत में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह शुरू हो सकती है। इसका मुख्य मकसद जन्म स्थान की जांच करके अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना है।
फरवरी में मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालने के बाद ज्ञानेश कुमार की यह तीसरी बैठक है। इसमें सीनियर अधिकारी जहां आयोग की SIR पॉलिसी पर प्रजेंटेशन देंगे, वहीं बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी SIR के क्रियान्वयन में राज्य का एक्सपीरियंस शेयर करेंगे।
इससे पहले, चुनाव आयोग ने मंगलवार को बिहार चुनाव आयोग को लेटर भेजकर मतदाताओं की पहचान के लिए आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश के बाद आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार पहचान का प्रमाण, नागरिकता का नहीं
सुप्रीम कोर्ट में 8 सितंबर को बिहार में SIR (वोटर वेरिफिकेशन) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कहा- आधार पहचान का प्रमाण पत्र है, नागरिकता का नहीं। कोर्ट ने चुनाव आयोग को वोटर की पहचान के लिए आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर मानने का भी आदेश दिया।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि आधार को लेकर अगर किसी तरह की शंका हो तो इसकी जांच कराएं। कोई भी नहीं चाहता कि अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल किया जाए।
SIR का मकसद- वोटर लिस्ट को अपडेट करना
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अवैध मतदाताओं जैसे विदेशी नागरिकों, मृत व्यक्तियों या स्थानांतरित लोगों को हटाना है। इस बीच कई राज्यों में बांग्लादेश और म्यांमार से आए प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है।
चुनाव आयोग ने SIR के लिए 2 तरीके बताए…
पहला: बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर, एक प्री-फील्ड फॉर्म गणना प्रपत्र (मतदाता की जानकारी और दस्तावेज) लेकर जाएंगे।
दूसरा: कोई भी व्यक्ति चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर यह फॉर्म डाउनलोड करके उसे भर सकता है।
स्क्रीनिंग के 4 नियम
- वोटर का नाम अगर 2003 की लिस्ट में है तो कोई दस्तावेज नहीं देना होगा। सिर्फ फॉर्म भरना होगा।
- 1 जुलाई 1987 से पहले जन्म हुआ है तो जन्मतिथि या जन्मस्थान प्रमाण देना होगा।
- 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म हुआ तो जन्मतिथि और जन्मस्थान दोनों का प्रमाण देना होगा।
- 2 दिसंबर, 2004 के बाद जन्मे हैं तो जन्मतिथि, जन्मस्थान का प्रमाण और माता-पिता के दस्तावेज देने होंगे।
विपक्ष ने पूरे मानसून सत्र SIR का विरोध किया
संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चला। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष ने संसद परिसर और सदन में प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसद बिहार SIR पर चर्चा कराने की मांग करते रहे। उनके विरोध और हंगामे के कारण दोनों सदनों में आखिरी दिन भी सदन की कार्यवाही नहीं हो सकी।

