रायपुर, एजेंसी। रायपुर में 45 करोड़ रुपए के नकली नोट खरीदने का सौदा करने पहुंचे कारोबारी से 1.13 करोड़ रुपए लेकर आरोपी फरार हो गए। सोशल मीडिया के जरिए दोनों पक्षों की पहचान हुई थी।
सौदे को लेकर रायपुर और महाराष्ट्र में कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन रकम लेने के बाद आरोपी गायब हो गए। मामले में तेलीबांधा थाना पुलिस जांच कर रही है।
कारोबारी की शिकायत पर दर्ज हुआ केस
पुलिस के मुताबिक, प्राइवेट फर्म संचालक उमेश गुप्ता की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने दावा किया कि उनके पास बड़ी मात्रा में नकली नोट हैं। उन्होंने 1.13 करोड़ रुपए कैश के बदले 45 करोड़ रुपए के नकली नोट देने की बात कही थी।
इसे लेकर रायपुर और महाराष्ट्र में कई बार बैठकें हुईं। आरोपियों ने खुद को बड़े नेटवर्क से जुड़ा बताकर भरोसा दिलाया कि तय समय पर नकली नोट दे देंगे। इस भरोसे में कारोबारी ने अलग-अलग किस्तों में 1.13 करोड़ रुपए उन्हें दे दिए।
रायपुर और महाराष्ट्र में हुईं कई बैठकें
FIR के अनुसार, सौदे को अंतिम रूप देने के लिए रायपुर के तेलीबांधा क्षेत्र के अलग-अलग होटलों में कई बैठकें हुईं। इसके बाद आरोपियों ने कारोबारी को महाराष्ट्र के अलग-अलग जगहों पर भी बुलाया, जहां सौदे को लेकर बातचीत हुई।
खेप आने का बहाना बनाकर टालते रहे आरोपी
रकम मिलने के बाद आरोपी लगातार नकली नोटों की खेप तैयार होने, सुरक्षा व्यवस्था और डिलीवरी में देरी का हवाला देकर कारोबारी को टालते रहे। काफी समय बीतने के बाद भी न तो नकली नोट मिले और न ही एडवांस की रकम वापस की गई। इसके बाद पीड़ित ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई।

2 थ्योरी पर जांच कर रही पुलिस
पुलिस इस मामले की दो पहलुओं पर जांच कर रही है। पहला, 1.13 करोड़ रुपए की कथित ठगी और दूसरा, एफआईआर में दर्ज उस दावे की जांच कि बड़ी मात्रा में नकली नोटों की सप्लाई और उन्हें बाजार में खपाने की योजना बनाई गई थी।
जांच के तहत होटल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल, यात्रा संबंधी दस्तावेज, नकद लेन-देन और महाराष्ट्र में हुई बैठकों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। इससे जुड़े अन्य मामले भी हैं या नहीं।
पुलिस ने केस को सेंसिटव मोड में डाल दिया है।
पुलिस ने कहा- मामला सेंसिटिव
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों ने इसे संवेदनशील मामला माना है। इसी वजह से अधिकारी अधिकृत जानकारी शेयर करने से बच रहे हैं।
