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मध्य-पूर्व तनाव से महंगी हुई खेती, DAP के दाम में 40% उछाल

मुंबई, एजेंसी। मध्य-पूर्व में जारी तनाव का असर अब भारत की खेती पर भी दिखाई देने लगा है। खेती में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख उर्वरक डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। भारत ने अब DAP को युद्ध से पहले की तुलना में लगभग 40 फीसदी अधिक कीमत पर खरीदने का समझौता किया है।

डीएपी की कीमतों में बड़ा उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक, Indian Potash Limited पश्चिमी तट के लिए 7.05 लाख टन DAP उर्वरक 930 डॉलर प्रति टन की दर से खरीदेगी, जबकि पूर्वी तट के लिए 6.41 लाख टन उर्वरक 935 डॉलर प्रति टन के भाव पर लिया जाएगा। फरवरी में यही कीमत करीब 667 डॉलर प्रति टन थी।

खेती की लागत बढ़ने की आशंका

खाद की कीमत बढ़ने का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ता है। किसान फसल उत्पादन में बड़ी मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करते हैं। यदि सरकार सब्सिडी नहीं बढ़ाती है, तो किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। फिलहाल सरकार DAP पर सब्सिडी देती है, जिससे किसानों को कुछ राहत मिलती है।

मध्य-पूर्व संकट से सप्लाई पर असर

फॉस्फेट उर्वरकों में इस्तेमाल होने वाले सल्फर की वैश्विक सप्लाई का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आता है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित बाधा से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। इससे आने वाले समय में खाद की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

यूरिया भी हुआ महंगा

भारत ने हाल ही में लगभग 25 लाख टन यूरिया की खरीद भी की है, जिसके लिए पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी कीमत चुकानी पड़ी। यह खरीद ऐसे समय में हुई है जब देश में मानसून सीजन शुरू होने वाला है और किसान धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।

क्या महंगी होगी आम लोगों की थाली?

अगर उर्वरकों की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो खेती की कुल लागत बढ़ सकती है। इसका असर धीरे-धीरे आटा, चावल, दाल और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार सब्सिडी कितनी बढ़ाती है और वैश्विक हालात आगे कैसे रहते हैं।

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