12वीं में कोरबा जिले के टॉपर रहे शशांक ने पूरा किया पायलट बनने का सपना, दिल्ली की रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी से हासिल किया प्रशिक्षण
भाजपा नेता लोचन प्रसाद राठौर के सुपुत्र हैं शशांक
कोरबा। मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो सपनों को हकीकत में बदलने की कोई उम्र नहीं होती। कोरबा के काशी नगर निवासी भाजपा नेता लोचन प्रसाद राठौर के होनहार पुत्र शशांक राठौर ने महज 22 वर्ष की उम्र में पायलट बनकर इस बात को साबित कर दिया। कभी आसमान में विमान उड़ाने का सपना देखने वाले शशांक अब बतौर पायलट अपने करियर की नई उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।

शशांक ने दिल्ली स्थित रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी से पायलट का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित क्षेत्र में खुशी का माहौल है। कम उम्र में हासिल की गई इस उपलब्धि को लेकर शशांक को लगातार बधाइयां मिल रही हैं।
पढ़ाई में भी रहे अव्वल, 12वीं में किया था जिला टॉप
शशांक राठौर की उपलब्धि केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं है। वर्ष 2022 में उन्होंने कक्षा 12वीं में कोरबा जिले में टॉप कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पायलट बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए विमानन क्षेत्र में प्रशिक्षण हासिल किया और आखिरकार 22 वर्ष की उम्र में पायलट बनने का गौरव हासिल किया।
एक परिवार दो बड़ी उपलब्धियां : भाई-बहन दोनों ने जिले का गौरव बढ़ाया
शशांक की सफलता के साथ उनके परिवार के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है। उनकी बहन साक्षी राठौर का चयन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में जूनियर ज्युडिशियल असिस्टेंट के पद पर हुआ है। एक ही परिवार के दोनों बच्चों द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में हासिल की गई सफलता से परिवार में उत्साह का माहौल है। दोनों भाई-बहन ने कोरबा जिला एवं मूल निवास बाराद्वार का गौरव बढ़ाया है।
शशांक के पिता लोचन राठौर काशी नगर, कोरबा निवासी हैं, जबकि उनकी माता श्रीमती पार्वती राठौर का मायका ग्राम सरहर है। माता-पिता ने बच्चों की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके बच्चों की मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का परिणाम है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
शशांक राठौर की यह उपलब्धि क्षेत्र के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करते हैं। 22 वर्ष की उम्र में पायलट बनने की उपलब्धि ने उनके परिवार के साथ-साथ कोरबा जिले को भी गौरवान्वित किया है और युवाओं के लिए संदेश दिया है कि अपना लक्ष्य इतना विशाल बना दो कि बेकार के लिए वक्त ही न बचे। सपने देखो, लक्ष्य तय करो और उसे पूरा करने के लिए जी जान से मेहनत करो। संघर्ष, लगन, जज्बा एवं कड़ी मेहनत से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
