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कोरबा जेल में कैदियों को लोकगीत से साक्षरता का संदेश:जेल में रहकर भी कर सकते हैं पढ़ाई, 27 सितंबर 2026 को होगी महापरीक्षा

कोरबा। कोरबा में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस से पहले साक्षरता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों और कॉलेजों में कई प्रतियोगिताएं और जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। इसी कड़ी में सार्वजनिक जगहों पर नुक्कड़ नाटक, लोकगीत और संगीत से लोगों को साक्षरता के लिए जागरूक किया गया।

इसी क्रम में कोरबा जिला जेल में भी साक्षरता कार्यक्रम हुआ। यहां संगीत के जरिए कैदियों को साक्षर बनने के लिए प्रेरित किया गया। लोकगीतों की प्रस्तुति ने ऐसा माहौल बनाया कि सभी कैदी मंत्रमुग्ध हो गए।

कार्यक्रम में शिक्षक कृष्णानंद चौहान ने राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ और शिक्षा प्रेरणा गीत ‘चला दीदी पढ़े बर जाबो’ गाया। सत्यनारायण मनहर ने ‘चलव ओ दीदी, चलव वो बहनी, स्कूल पढ़े जाना है’ और ‘झोला दे दे दीदी, ओ पाठशाला जाबो न’ जैसे गीत सुनाकर शिक्षा का महत्व समझाया। ढोलक पर कृष्णा वैष्णव और पवन सिंह चौहान ने साथ दिया।

इस मौके पर जिला परियोजना अधिकारी ज्योति शर्मा ने बताया कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम से असाक्षर लोगों को साक्षर बनाया जा रहा है। साक्षर होने के बाद कोई भी व्यक्ति नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का शिक्षित और साक्षर होना जरूरी है।

जेलर अमितेश साहू ने जानकारी दी कि 15 साल से ज्यादा उम्र के असाक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए 27 सितंबर 2026 को महापरीक्षा होगी। जिले के सभी असाक्षर लोग इस महापरीक्षा में शामिल होकर साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

संदीप शर्मा, रामकुमार कुर्रे और प्रधान पाठक अंधरी कछार ने भी उल्लास और साक्षरता के बारे में प्रेरणादायक बातें कहीं। उन्होंने अपील की कि साक्षरता सिर्फ पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाती है।

अधिकारियों ने कहा कि हम सभी मिलकर ‘सभी पढ़ें, सभी बढ़ें और सभी को साक्षर करें’ के संकल्प को पूरा करें।

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