265 पदों के लिए 1:3 के अनुपात में 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाना था, लेकिन केवल 608 को बुलाया गया, 187 अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिला
मूल्यांकन में भारी धांधली: एक ही प्रश्न के समान उत्तर पर एक अभ्यर्थी को 2 अंक और दूसरे को शून्य (0) अंक दिया गया यदि अभ्यर्थी न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर सके तो आयोग अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक करे
कोरबा। पीएससी (लोक सेवा आयोग) की परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में असमानता और स्थानीय विकास कार्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर प्रदेश के पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने बुधवार को प्रेस वार्ता को संबोधित किया।
प्रेस वार्ता में रामपुर विधायक फुल सिंह राठिया, जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष मुकेश राठौर, ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, कोरबा मंडल अध्यक्ष पालूराम साहू सहित विभिन्न ब्लॉक/मंडल/महिला कांग्रेस अध्यक्षों सहित कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि सीजी पीएससी परीक्षा में पारदर्शिता का अभाव है जिससे 187 अभ्यर्थी वंचित रह गए।
पूर्व मंत्री ने आगे कहा कि जब से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है, लगातार झूठी घोषणाएं और विज्ञापनों का प्रदर्शन हो रहा है, जबकि रोजगार का कोई पता नहीं है। पीएससी परीक्षा को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
साक्षात्कार में नियमों की अनदेखी: पिछली परीक्षा 2024 में 265 पदों पर भर्ती के लिए नियमानुसार 1:3 के अनुपात में 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया जाना चाहिए था। लेकिन आयोग द्वारा केवल 608 अभ्यर्थियों को ही बुलाया गया और 187 अभ्यर्थियों को प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
अंक सार्वजनिक करने की मांग: आयोग का तर्क है कि अभ्यर्थियों ने ‘न्यूनतम अंक’ प्राप्त नहीं किए। जयसिंह अग्रवाल ने सवाल उठाया कि क्या छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी खत्म हो गई है या योग्य अभ्यर्थी नहीं मिल रहे? जब रेलवे में स्वीपर के पदों के लिए लाखों एमबीए और बीई होल्डर आवेदन करते हैं, तो पीएससी में अभ्यर्थी न मिलने का दावा संदेहास्पद है। यदि अभ्यर्थियों के अंक कम थे, तो आयोग प्रेस और जनता के सामने सभी के अंक सार्वजनिक करे।
उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भारी असमानता
उन्होंने परीक्षा के मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने दो अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रश्न क्रमांक 5 में दोनों अभ्यर्थियों ने बिल्कुल समान और सही उत्तर लिखा है। इसके बावजूद एक अभ्यर्थी को 2 अंक दिए गए और दूसरे को 0 (शून्य) अंक दिया गया।
इसी प्रकार माता राजिम, घरेलु हिंसा, बौद्ध धर्म के महानिर्वाण जैसे ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण विषयों से संबंधित प्रश्नों के अंकों में भी भारी असमानता देखी गई है, जो सीधे तौर पर धांधली और घोलमाल की ओर इशारा करती है।
कांग्रेस शासनकाल की पारदर्शी भर्ती व पदोन्नति नीति
जयसिंह अग्रवाल ने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय उनके विभाग में अधिकांश भर्तियाँ व्यापम के माध्यम से पारदर्शी तरीके से कराई जाती थीं।
भर्तियों के साथ-साथ कर्मचारियों की पदोन्नति पर ध्यान दिया जाता था। 5 साल में मिलने वाले प्रमोशन को 2 से 3 साल की छूट देकर पूरा किया गया ताकि निचले कर्मचारियों को आगे बढ़ने का मौका मिले और नए पदों पर भर्ती के रास्ते खुलें।
वर्तमान पीएससी मामले में भी यदि अंकों में थोड़ी छूट देनी पड़ती तो देकर 795 पूरे अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया जाना चाहिए था।
निष्पक्ष जांच और आंदोलन की चेतावनी
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि पीएससी की संपूर्ण गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी एवं वरिष्ठ नेताओं के निर्देशानुसार, युवाओं के हक के लिए और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी जल्द ही सड़क पर उतरकर उग्र धरना, प्रदर्शन और आंदोलन करेगी।

