DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

प्रेम के वशीभूत हैं परमात्मा, प्रह्लाद की पुकार पर रलिया में अवतरित हुए भगवान नरसिंह, “कण-कण में हैं भगवान

पंडित दयानंद कृष्ण महाराज ने बताया—प्रेम से भजे जो हरि को, उसका बेड़ा पार है

कोरबा/हरदीबाजार । ग्राम रलिया में राठौर परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के तीसरे दिन भक्ति का चरमोत्कर्ष देखने को मिला। कथाव्यास से पंडित दयानंद कृष्ण महाराज ने अपनी अमृतमयी वाणी से प्रभु प्रेम की महिमा का बखान करते हुए बताया कि भगवान केवल प्रेम के भूखे हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ पुकारने पर ईश्वर पाषाण से भी प्रकट हो जाते हैं।

अटूट विश्वास की विजय

कथा के तीसरे दिवस कथाव्यास से पंडित दयानंद कृष्ण महाराज ने भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह अवतार के प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद से पूछा कि “तुम्हारा भगवान कहाँ है?” तब प्रह्लाद ने पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि “प्रभु कण-कण में हैं।” अपने भक्त के वचनों को सत्य सिद्ध करने के लिए भगवान विष्णु ने खंभे को फाड़कर नृसिंह रूप में अवतार लिया।
जैसे ही कथा में भगवान नरसिंह के प्रकट होने का प्रसंग आया, पूरा पंडाल ‘जय नरसिंह देव’ के नारों से गूंज उठा। महाराज जी ने समझाया कि नरसिंह अवतार हमें सिखाता है कि जो प्रेम से हरि को भजता है, प्रभु उसका बेड़ा अवश्य पार करते हैं।
तीन दिनों की कथा का सार: ज्ञान से प्रेम तक का सफर

अब तक के तीन दिनों की कथा यात्रा में श्रद्धालुओं ने कई दिव्य प्रसंगों का रसपान किया।प्रथम दिवस: पावन कलश यात्रा के साथ भागवत महात्म्य और शुकदेव-परीक्षित जन्म की कथा सुनाई गई।
द्वितीय दिवस: विदुर-मैत्रेय संवाद, कपिल उपाख्यान और ध्रुव चरित्र के माध्यम से मर्यादा और तपस्या का मार्ग बताया गया।

तृतीय दिवस: आज नरसिंह अवतार के माध्यम से “प्रेम ही सर्वस्व है” का संदेश दिया गया। कथा वाचक पंडित दयानंद कृष्ण महाराज ने कहा कि ईश्वर को पाने के लिए किसी कर्मकांड की नहीं, बल्कि केवल निर्मल प्रेम और भाव की आवश्यकता है।”प्रेम ही कर है, प्रेम ही धर्म है। प्रेम से जो हरि भजे, तो भाव से बेड़ा पार है। प्रह्लाद का प्रेम ही था जिसने स्वयं नारायण को नरसिंह बनने पर विवश कर दिया।”
भक्ति रस में डूबा राठौर परिवार और ग्राम रलिया

इस आयोजन में मुख्य यजमान राठौर परिवार सहित समस्त ग्रामवासी सेवा और भक्ति में लीन हैं। कथा के दौरान सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते रहे। आरती के बाद भारी संख्या में उपस्थित जनसमूह को महाप्रसाद का वितरण किया गया।

Exit mobile version