मुंबई, एजेंसी। लगातार तेजी के बाद सोने की कीमतें पिछले कुछ समय से गिर रही हैं। इस बीच Deutsche Bank ने अपनी नई रिपोर्ट में सोने को लेकर बड़ा अनुमान जारी किया है। बैंक का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में 3 से 4 बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत घटकर 3,800 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। बैंक ने अपने पहले के गोल्ड प्राइस अनुमान में 20 प्रतिशत से अधिक की कटौती की है।
यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो मौजूदा डॉलर विनिमय दर के आधार पर भारत में 10 ग्राम सोने की आधार कीमत करीब 1.15 लाख रुपए रह सकती है। हालांकि अंतिम खुदरा कीमत पर आयात शुल्क, जीएसटी और अन्य शुल्कों का भी प्रभाव पड़ेगा।
डॉयचे बैंक का यह भी कहना है कि यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखता है, तो वर्ष के अंत तक सोना लगभग 4,800 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रह सकता है।
गिरावट के पीछे कई कारण
बैंक ने संभावित गिरावट के पीछे कई कारण बताए हैं। इनमें अमेरिका में बढ़ती महंगाई के चलते ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना प्रमुख है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने की मांग को प्रभावित करती हैं, क्योंकि निवेशक बॉन्ड और डॉलर जैसे विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
इसके अलावा, भारत और चीन जैसे प्रमुख बाजारों में सोने की मांग में नरमी भी कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है। चीन में स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों में सुधार और अन्य निवेश विकल्पों की उपलब्धता के कारण सोने की खरीदारी में कमी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक नीतियां, ब्याज दरों का रुख और प्रमुख देशों में मांग की स्थिति आने वाले महीनों में सोने की कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
