मुंबई, एजेंसी। कुछ समय पहले रुपए में बड़ी गिरावट के अनुमान लगाए जा रहे थे। डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी के टूटकर 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक कमजोर होने की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि अब वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ग्रुप (Goldman Sachs Group) का मानना है कि रुपए में लगातार बना दबाव कम होने हो सकता है। बैंक के अनुसार, सरकार और RBI द्वारा विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम रुपए को सहारा देंगे। गोल्डमैन का मानना है कि इन कदमों से रुपए का गिरावट का दबाव हल्का होगा।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक गोल्डमैन का दावा है कि आरबीआई और सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए उठाए गए कदमों से रुपए पर पड़ने वाले गिरावट के दबाव को सीमित किया जा सकेगा। विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड में निवेश पर टैक्स में छूट और अधिक डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की अनुमति तथा विदेशी-करेंसी बॉन्ड्स और डिपॉजिट्स जुटाने वाले बैंकों को छूट से रुपए को सपोर्ट मिल सकता है। कुछ एनालिस्ट्स के मुताबिक इन कदमों से $5000 करोड़ तक का विदेशी निवेश आ सकता है।
किस लेवल पर रहेगा रुपया?
हाल ही में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण रुपया दबाव में रहा। पिछले महीने यह डॉलर के मुकाबले रुपया 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। जिसके बाद कई एनालिस्ट्स ने रुपए के 100 प्रति डॉलर का लेवल छूने तक की आशंका जता दी।
हालांकि अब गोल्डमैन ने अपने अनुमान में सुधार किया है और कहा है कि अगले तीन महीनों में रुपया एक अमेरिकी डॉलर की तुलना में रू.96 पर पहुंच सकता है। पहले यह अनुमान रू.97 का था। वहीं 6 महीने के अनुमान को रू.96 पर बरकरार रखा है तो 12 महीने के अनुमान को प्रति डॉलर रू.96 से बढ़ाकर रू.97 कर दिया है।
