मुंबई, एजेंसी। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में आने वाले समय में बड़ी राहत मिल सकती है। JP Morgan ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2027 तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 30 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह होगा कि वैश्विक तेल सप्लाई मांग से कहीं ज्यादा हो जाएगी। भारत जैसे देशों के लिए यह बड़ी राहत है, जो अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है।
सप्लाई डिमांड से कई गुना ज्यादा बढ़ेगी
JP Morgan के अनुसार अगले तीन साल में तेल की खपत बढ़ेगी लेकिन सप्लाई इससे भी ज्यादा तेज रफ्तार से बढ़ेगी। नॉन-OPEC+ देश बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ा रहे हैं।
- दुनिया में तेल की मांग 2025 में 0.9 मिलियन बैरल/दिन बढ़कर 105.5 मिलियन बैरल/दिन तक पहुंच सकती है।
- 2026 और 2027 में भी मांग बढ़ेगी लेकिन सप्लाई उससे तीन गुना तेज बढ़ने का अनुमान है।
इस असंतुलन की मुख्य वजह है—गहरे समुद्र से तेल उत्पादन की सस्ती और भरोसेमंद तकनीक और शेल ऑयल का बढ़ता उत्पादन।
2027 तक सप्लाई बढ़ोतरी का आधा हिस्सा नॉन-OPEC+ देशों से
JP Morgan का कहना है कि सप्लाई में होने वाली कुल बढ़ोतरी का 50% हिस्सा नॉन-OPEC+ देशों से आएगा। गहरे समुद्र में तेल निकालने वाली नई तकनीकें उत्पादन को और सस्ता और आसान बना रही हैं। 2029 तक के लिए तेल उत्पादन जहाजों की अधिकांश बुकिंग भी फाइनल हो चुकी है।
तेल की कीमत कितनी गिरेगी?
JP Morgan के मुताबिक….
- 2026 में ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर से नीचे आ सकता है।
- साल के अंतिम महीनों में यह 50 डॉलर शुरुआती स्तर तक पहुंच सकता है।
- साल के अंत तक कीमतें 40 डॉलर तक गिरने की संभावना।
- 2027 में औसत कीमत 42 डॉलर रह सकती है और
- साल के अंत तक यह 30 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती है।
- फिलहाल ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा ऊपर चल रहा है।
