नई दिल्ली,एजेंसी। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को मीडिया और लोगों से अपील की है कि वे सीनियर सैन्य अधिकारियों और उनके परिवारों की गोपनीयता का सम्मान करें। सरकार ने एडवाइजरी में लिखा, ‘सेवारत या रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों के निजी आवासों या परिवारों से इंटरव्यू करने से बचें।’
डिफेंस मिनिस्ट्री ने एडवाइजरी में कहा है कि जब तक आधिकारिक तरीके से इसका इन्विटेशन या इजाजत न दी गई हो, तब तक आवासीय पते, परिवार के सदस्यों की तस्वीरें या अन्य निजी ब्योरों का छापने या प्रसारित करने से बचें।’
मंत्रालय ने एडवाइजरी क्यों जारी की?
मंत्रालय ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी देने के लिए समय-समय पर कई अफसर मीडिया के सामने आए। इन अफसरों को लेकर हो रही लगातार कवरेज उनके परिवारों के लोगों और निजी जिंदगी तक पहुंच गई।’
‘मीडियाकर्मियों ने कथित तौर पर उनके आवास पर जाकर उनके परिवार के सदस्यों से संपर्क साधने की कोशिश की। इसके अलावा सेना के अफसरों के परिवार से आधिकारिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत मुद्दे पर कवरेज की गई।’
भारत-PAK तनाव में ऑनलाइन एब्यूज का शिकार हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी
10 मई को भारत पाकिस्तान के बीच सीजफायर के ऐलान के बाद कई यूजर्स ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी की पोस्ट्स पर ऑनलाइन एब्यूज कर रहे थे। यहां तक कि उनके परिवार के साथ उनकी पुरानी तस्वीरें शेयर हो रही थीं जिसके साथ उनकी बेटी का मोबाइल नंबर और कई तरह के कमेंट्स किए जा रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपना एक्स अकाउंट सिक्योर कर लिया।

उनके इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स उनकी ऑनलाइन ट्रोलिंग की निंदा कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि सीनियर ऑफिसर को पर्सनल लेवल पर ट्रोल करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
सपा नेता अखिलेश यादव विक्रम मिसरी के बचाव में उतरें थे
विदेश सचिव की ट्रोलिंग पर अखिलेश यादव ने कहा, इस मामले की गहराई से जांच की जाए और दोषियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स, बैंक खाते और ई-पेमेंट खातों का पूरा ब्योरा निकाला जाए। सपा अध्यक्ष ने ईडी, सीबीआई, साइबर सिक्योरिटी और अन्य जांच एजेंसियों को तत्काल सक्रिय करने की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने कहा, सरकार देश की सुरक्षा के नाम पर प्रतिष्ठित यूट्यूब चैनलों को तो बंद कर देती है, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं करती। यदि सरकार 24 घंटे के भीतर कोई कदम नहीं उठाती, तो जनता यह समझ लेगी कि ये तत्व किसके इशारे पर काम कर रहे हैं और उन्हें कौन बचा रहा है। भाजपा की चुप्पी उसकी संलिप्तता मानी जाएगी।
