मुंबई, एजेंसी। देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। बेहतर राजस्व के बावजूद बढ़ती लागत और ईंधन विपणन पर दबाव के कारण दोनों कंपनियों ने इस तिमाही में घाटा दर्ज किया।
HPCL ने जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपए का समेकित (कंसोलिडेटेड) शुद्ध घाटा दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 4,111 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था। इस दौरान कंपनी का परिचालन राजस्व लगभग 21 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपए रहा लेकिन लागत बढ़ने से मुनाफे पर दबाव पड़ा।
वहीं BPCL को इस तिमाही में 3,962 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ। यह कंपनी का लगातार 15 तिमाहियों बाद पहला नुकसान है। पिछले वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने 6,123 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। हालांकि कंपनी का राजस्व बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपए पहुंचा लेकिन ईंधन विपणन पर बढ़े दबाव से वित्तीय प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
क्यों हुआ नुकसान?
कंपनियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और ईंधन कीमतों में सीमित संशोधन का असर उनके मार्जिन पर पड़ा। इसके अलावा, एलपीजी की बिक्री पर भी अंडर-रिकवरी का बोझ रहा। जून तिमाही में HPCL ने 3,607 करोड़ रुपए और BPCL ने 3,485 करोड़ रुपए की एलपीजी अंडर-रिकवरी दर्ज की।
हालांकि, रिफाइनिंग कारोबार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। HPCL का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) बढ़कर 23.80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, लेकिन ईंधन विपणन से हुए नुकसान ने इस लाभ का प्रभाव कम कर दिया।
दोनों कंपनियों का कहना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद देशभर में ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी रही। साथ ही, रिफाइनिंग क्षमता विस्तार, नई परियोजनाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी रखने की योजना पर काम किया जा रहा है।
