सक्ती। कुर्मी समाज की एकता, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव को सशक्त रूप देने वाला 24वां कुर्मी साझा कार्यक्रम शक्ति नगरी में अत्यंत गरिमामय, भव्य और भावनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल सामाजिक समरसता का प्रतीक बना, बल्कि समाज की संगठित शक्ति, परंपराओं के प्रति सम्मान और भविष्य की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक अवसर भी सिद्ध हुआ।

इस गरिमामयी कुर्मी साझा कार्यक्रम में प्रदेश एवं देश स्तर के अनेक प्रख्यात जनप्रतिनिधियों और समाज के वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद विजय बघेल (दुर्ग), सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े (जांजगीर–चांपा), श्रीमती लता ऋषि चन्द्राकर, पूर्व मंत्री धरमलाल कौशिक, पूर्व विधायक नारायण चंदेल, केशव चन्द्रा एवं प्रांतीय अध्यक्ष कृष्ण कांत चंद्रा का साल, श्रीफल एवं पुष्पहार से आत्मीय एवं सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम स्थल पर कुर्मी समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि कुर्मी समाज आज संगठन, चेतना और नेतृत्व के स्तर पर निरंतर सशक्त हो रहा है। मंच से वक्ताओं ने समाज की गौरवशाली परंपराओं, कृषि आधारित संस्कृति, मेहनतकश पहचान और सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि कुर्मी समाज सदैव राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और विकास की मुख्यधारा में अग्रणी रहा है।
अतिथियों ने अपने संबोधन में शिक्षा, संगठनात्मक मजबूती, सामाजिक एकजुटता और राजनीतिक जागरूकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि ऐसे साझा कार्यक्रम समाज को जोड़ने, नई पीढ़ी को संस्कार देने और सामूहिक निर्णय की शक्ति को मजबूत करने का कार्य करते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज की रीढ़ बनकर आगे आएं और सामाजिक उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत भावनात्मक रहा, जब समाज के वरिष्ठ नेतृत्व को सम्मानित किया गया और समाज की एकता के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया। हर चेहरे पर गर्व, आत्मविश्वास और अपने समाज के प्रति गहरा जुड़ाव साफ दिखाई दे रहा था। कुर्मी साझा कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज संगठित होता है, तो उसकी आवाज मजबूत, प्रभावी और निर्णायक बनती है।
कुल मिलाकर, सक्ती में आयोजित 24वां कुर्मी साझा कार्यक्रम
➡️ सामाजिक स्वाभिमान का उत्सव,
➡️ एकता और संगठन की मिसाल,
➡️ और भविष्य के लिए दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक मंच बनकर सामने आया,
जिसने कुर्मी समाज की शक्ति, संस्कार और संकल्प को एक बार फिर पूरे प्रदेश के सामने मजबूती से स्थापित किया।
