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देश में विनिर्माण गतिविधियों की वृद्धि जून में धीमी पड़ी: पीएमआई

नई दिल्ली, एजेंसी। देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों की वृद्धि जून में धीमी पड़ गई। नए कारोबारी ऑर्डर और अंतरराष्ट्रीय बिक्री की वृद्धि दर नरम रहने से खरीद, रोजगार और उत्पादन की रफ्तार भी कम रही। बुधवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मई के 55.0 से घटकर जून में 54.2 पर आ गया। यह 2022 के मध्य के बाद से क्षेत्र की स्थिति में दूसरा सबसे कमजोर सुधार दर्शाता है। 

एचएसबीसी इंडिया क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ताओं की डिलीवरी अवधि और खरीदे गए माल के भंडार जैसे संकेतकों के आधार पर तैयार किया जाने वाला समग्र सूचकांक है। क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) में 50 से ऊपर का स्तर गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे का स्तर संकुचन को दर्शाता है। सर्वेक्षण के अनुसार, कई कंपनियों ने मांग की स्थिति में सुधार की बात कही, जबकि कुछ कंपनियों ने अपने उत्पादों की मांग कमजोर रहने और बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का उल्लेख किया।

एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, ”भारत की विनिर्माण पीएमआई मई के 55.0 से घटकर जून में 54.2 पर आ गया, जो विस्तार तो दर्शाता है लेकिन धीमी रफ्तार से। यह संकेत देता है कि पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी पहले की तेजी के बाद मांग में कुछ नरमी आई है।” उन्होंने कहा, ” उत्पादन, नए ऑर्डर, निर्यात ऑर्डर और रोजगार सभी क्षेत्रों में वृद्धि की रफ्तार धीमी रही। वहीं अंतरराष्ट्रीय बिक्री में मार्च, 2023 के बाद सबसे कमजोर बढ़ोतरी दर्ज की गई।” 

भारतीय वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय मांग जून में भी बढ़ी लेकिन इसकी रफ्तार 39 महीनों में सबसे कमजोर रही। इसकी वजह कुछ यूरोपीय बाजारों में कमजोर बिक्री बताई गई। कीमतों के मोर्चे पर, मांग की वृद्धि कमजोर पड़ने से वस्तु उत्पादक कीमतें बढ़ाने के प्रति कम उत्सुक दिखे। उत्पादन कीमतों में बढ़ोतरी मध्यम रही और पिछले तीन महीनों में सबसे कम दर्ज की गई। रोजगार के मोर्चे पर, कार्यभार स्थिर रहने और मांग का दबाव नहीं होने से कंपनियों ने नई नियुक्तियां रोक दीं या उन्हें कम कर दिया। क्षमता पर दबाव नहीं होने से वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अंत में भर्ती गतिविधियां सीमित रहीं।

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