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गोलीकांड-सुपारी किलिंग…कांग्रेस नेता को नहीं मिली बेल:शासन ने कहा- आरोपी नागेंद्र ने दिए थे हथियार, 10 महीने से फरार, हाईकोर्ट ने जमानत खारिज की

बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर के बहुचर्चित मस्तूरी गोलीकांड और सुपारी किलिंग केस में फरार आरोपी और कांग्रेस नेता नागेंद्र राय की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने मामले की गंभीरता, आरोपी के करीब 10 महीने से फरार होने और उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

मस्तूरी में 28 अक्टूबर 2025 की शाम करीब 6 बजे तमेश सिंह के ऑफिस के बाहर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस हमले में धनेंद्र सिंह (राजू सिंह) और चंद्रकांत सिंह को गोलियां लगी थीं।

मस्तूरी में 28 अक्टूबर 2025 की शाम करीब 6 बजे तमेश सिंह के ऑफिस के बाहर फायरिंग हुई थी। इस दौरान धनेंद्र सिंह (राजू सिंह) और चंद्रकांत सिंह को गोली लगी थी। मामले में नागेंद्र राय को आरोपी बनाया गया है और वह घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है।

दो लाख में दी थी हत्या की सुपारी

जांच में यह बात सामने आई कि नितेश सिंह, चंद्रकांत सिंह, राजू सिंह, तामेश सिंह और अन्य लोगों की हत्या करने के लिए 2 लाख रुपए की सुपारी दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी साजिश में कांग्रेस नेता नागेंद्र राय की अहम भूमिका थी।

आरोप है कि नागेंद्र राय ने ही सह-आरोपियों को वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार मुहैया कराए थे। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि नागेंद्र ने अन्य आरोपियों के माध्यम से विश्वजीत अनंत के साथ मीटिंग की थी और हत्या की यह सुपारी दी थी। कॉल डिटेल्स से भी नागेंद्र राय के अन्य सह-आरोपी तारकेश्वर पाटले के लगातार संपर्क में होने की पुष्टि हुई है।

बचाव में तर्क- राजनीतिक रंजिश में फंसाया गया

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नागेंद्र राय के वकील ने कहा कि उन्हें राजनीतिक दल से जुड़े होने की वजह से इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वकील का कहना था कि नागेंद्र राय पर हथियार उपलब्ध कराने या सह आरोपी विश्वजीत के साथ किसी तरह की डील करने का कोई सीधा सबूत नहीं है।

वकील ने यह भी बताया कि नागेंद्र राय के खिलाफ पहले दर्ज 8 मामलों में से 4 मामलों में वह बरी हो चुके हैं, जबकि एक मामले में अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है।

शासन का जवाब- 10 माह से फरार है आरोपी

राज्य शासन की ओर से बताया गया कि आरोपी नागेंद्र राय ने वारदात के लिए हथियार उपलब्ध कराए थे। वह दूसरे आरोपियों के लगातार संपर्क में था और पिछले 10 महीने से ज्यादा समय से फरार है। इसके अलावा उसके खिलाफ 8 अन्य गंभीर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि नागेंद्र राय पर हथियार उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप है। वह लंबे समय से फरार है और जांच में भी सहयोग नहीं कर रहा है। उसके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। इन सभी बातों को देखते हुए हाईकोर्ट ने नागेंद्र राय को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

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