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हवाला…दिल्ली-मुंबई के लिए रू.1 लाख पर रू.2,000 कमीशन:छत्तीसगढ़ में ट्रांसपोर्टरों की मदद से कैश ट्रांसफर, 3 मामलों में 11 करोड़ जब्त

रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में हवाला कारोबार का नेटवर्क बड़े कारोबारियों तक फैला हुआ है। रायपुर से दिल्ली और मुंबई रकम भेजने के लिए हवाला कारोबारी एक लाख रुपए पर 1,500 से 2,000 रुपए तक कमीशन लेते हैं। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में ज्यादातर कारोबारी रायपुर के हैं। सराफा, लोहा-आयरन और गुटखा कारोबारियों के साथ कुछ उद्योगपतियों का सिंडिकेट हवाला कारोबार को बढ़ावा दे रहा है।

पुलिस के पास ऐसे तीन दर्जन से ज्यादा कारोबारियों की जानकारी है, हालांकि इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। सिंडिकेट में शामिल कुछ कारोबारियों के नाम पहले भी ED और ACB की जांच में सामने आ चुके हैं। हाल के मामलों में पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर 11 करोड़ रुपए नकद जब्त किए हैं।

दुर्ग के खुर्सीपार में एक पिकअप के स्पेशल चेंबर से 4 करोड़ रुपए मिले।

तारीख: 25 अक्टूबर वक्त: रात 11 बजे

जगह: दुर्ग-खुर्सीपार

पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर पिकअप (CG 04 QU 5996) को रोका। गाड़ी में दो युवक सवार थे, जिन्होंने अपनी पहचान भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे के रूप में बताई।

पुलिस ने गाड़ी की तलाशी ली, तो पिकअप में बने स्पेशल चेंबर से 4 करोड़ रुपए मिले। आरोपियों ने रायपुर के भनपुरी स्थित जीडी ट्रांसपोर्ट से पैसा लोड करने की बात स्वीकार की। दुर्ग पुलिस ने आगे की जांच के लिए केस इनकम टैक्स के अधिकारियों को सौंप दिया।

न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर हंस ट्रैवल्स से पैसे बरामद किए थे।

तारीख: 6 मई 2026

वक्त: दोपहर 2 बजे

जगह: न्यू राजेंद्र नगर, रायपुर

रायपुर की न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर थाना क्षेत्र स्थित हंस ट्रैवल्स में दबिश दी। ट्रैवल्स ऑफिस में जांच के दौरान बोरियों में 20 रुपए के 400 बंडल और 10 रुपए के 800 बंडल मिले।

कुल जब्त राशि करीब 16 लाख रुपए बताई गई। मामले में रकम जब्त कर पुलिस ने जांच के लिए केस इनकम टैक्स अधिकारियों को सौंप दिया।

कुम्हारी पुलिस ने गुजरात के इन युवकों से 6 करोड़ जब्त किया था।

तारीख: 20 सितंबर

वक्त: सुबह 8 बजे

जगह: दुर्ग, कुम्हारी

राजधानी रायपुर से 500 के नोटों से भरी दो गाड़ियां निकलीं। दोनों गाड़ियों में 6 करोड़ 60 लाख रुपए बंडलों में लोड थे। कुम्हारी के पास पुलिस ने दोनों तरफ से गाड़ियां अड़ाकर उन्हें रोका। गाड़ियों में सवार चार लोग उतरे। इनमें शक्ति सिंह, अल्पेश कुमार, ठाकुर महेश सिंह और वाघेला जुहरू भाई शामिल थे।

शुरुआत में वे खुद को व्यापारी बता रहे थे। गाड़ियां जीपीएस से लैस थीं। पुलिस ने सख्ती से जांच की, तो गाड़ियों से 6 करोड़ 60 लाख रुपए जब्त किए गए। पुलिस ने आगे की कार्रवाई के लिए केस इनकम टैक्स अधिकारियों को सौंप दिया।

रायपुर के कारोबारियों से जुड़े हवाला के तार

इन सभी मामलों के तार रायपुर के कारोबारियों से जुड़े हैं। पुलिस अधिकारी भी अनधिकृत रूप से राजधानी में धड़ल्ले से हवाला कारोबार चलने की बात स्वीकार करते हैं। रायपुर में किन कारोबारियों द्वारा हवाला कारोबार किया जा रहा है? हालांकि, इस मामले में पुलिस ने किसी का नाम नहीं लिया है।

रायपुर में कैसे चल रहा हवाला का खेल ?

रायपुर में पहले भी हवाला की रकम पकड़ी जा चुकी है। हवाला सिंडिकेट किस तरह काम करता है? इसकी जानकारी भास्कर टीम ने इस सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों से ली।

नाम नहीं छापने की शर्त पर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जानकारों के मुताबिक, रायपुर में हर दिन 30 करोड़ रुपए का हवाला कारोबार हो रहा है। रायपुर से नागपुर, मुंबई और झारखंड पैसे भेजने की मांग ज्यादा है।

एक लाख रुपए (एक पेटी) भेजने पर 1,500 से 2,000 रुपए तक कमीशन तय है। हवाला का कारोबार रायपुर से विदेशों तक फैला होने का दावा किया जाता है। हवाला कारोबार से जुड़े लोग दुबई, श्रीलंका और नेपाल में भी पैसे ट्रांसफर करने की बात कहते हैं।

रायपुर से दिल्ली-मुंबई तक हवाला

रायपुर से सबसे ज्यादा हवाला मुंबई, दिल्ली, गुजरात और झारखंड में किया जा रहा है। झारखंड में हवाला के जरिए रकम भेजने पर एक लाख रुपए के पीछे 300 से 700 रुपए तक कमीशन लगता है। वहीं, मुंबई और दिल्ली में रकम भेजने के लिए हवाला कारोबारी 1,500 से 2,000 रुपए तक कमीशन ले रहे हैं।

रायपुर में कई कारोबारी अपने कच्चे पैसे के लेन-देन के लिए सिंडिकेट बनाकर काम कर रहे हैं। सबसे ज्यादा हवाला एमजी रोड इलाके के कुछ कारोबारी कर रहे हैं।

ED की जांच में हो चुकी हवाला की पुष्टि

ED के अधिकारियों ने जांच के बाद अपनी चार्जशीट में महादेव बुक का पैसा अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए हवाला का इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि की है। महादेव बुक सिंडिकेट में शामिल आरोपियों ने कबूल किया है कि रायपुर और दुर्ग के हवाला कारोबारियों के माध्यम से विदेशों से पैसा आता था। यह पैसा अधिकारियों और राजनेताओं तक पहुंचता था। इस रकम को इधर से उधर पहुंचाने के लिए कई कूरियर बॉय काम करते थे।

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