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कानूनी समीक्षा में HDFC बैंक को पूर्व चेयरमैन की चिंताओं को लेकर नहीं मिला कोई सबूत

नई दिल्ली, एजेंसी। निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक ने कहा है कि दो बाहरी विधि कंपनियों की एक स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अपने इस्तीफा पत्र या बाद के सार्वजनिक बयानों में जताई गई चिंताओं को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। बैंक ने कहा कि 24 मार्च को घोषित इस समीक्षा में यह जांच की गई कि क्या चक्रवर्ती ने जो चिंता जताई उसका कोई सबूत है। इस बात का पता लगाया गया कि क्या उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कोई असहमति दर्ज कराई थी और क्या ऐसी किसी असहमति का समाधान किया गया था। 

चक्रवर्ती ने नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। यह पहली बार था जब एचडीएफसी बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने बीच में ही पद छोड़ दिया, जिससे बैंक के कामकाज पर चिंताएं उत्पन्न हुईं। चक्रवर्ती ने 17 मार्च के अपने इस्तीफे में कहा, ”मैंने पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ घटनाएं और जो तौर-तरीकों को देखा है, वह मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे उक्त निर्णय का आधार है।” 

एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह समीक्षा विल्सन सोनसिनी गुडरिच एंड रोसाटी, पीसी और वाडिया गांधी एंड कंपनी ने तीन महीने में की है। इसमें कहा गया है कि विधि कंपनियों ने चक्रवर्ती के इस्तीफे से पहले के दो वर्षों में निदेशक मंडल और समिति की बैठकों के ब्योरे और एजेंडा पत्रों की समीक्षा की, हजारों दस्तावेजों की जांच की और समितियों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी और वरिष्ठ कार्यकारियों समेत स्वतंत्र निदेशकों से पूछताछ की। विधि कंपनियों ने चक्रवर्ती से समीक्षा में भाग लेने के लिए कई बार अनुरोध किया, लेकिन उनका साक्षात्कार नहीं हो सका। 

इसमें कहा गया है, ”व्यापक कानूनी समीक्षा पूरी करने के बाद, विधि कंपनियों ने पाया कि चक्रवर्ती के बयान और उनके निहितार्थ रिकॉर्ड और गवाहों के साक्षात्कारों से साबित नहीं हुए।” समीक्षा में पाया गया कि चक्रवर्ती ने जिन निदेशक मंडल की बैठकों में भाग लिया उनके ब्योरों को व्यापक रूप से लिखा और उसकी समीक्षा के साथ अनुमोदन प्रक्रिया का पालन किया जाता था। इससे उन्हें कोई भी असहमति या चिंता दर्ज करने का अवसर मिलता था। बैंक ने कहा कि उसे निदेशक मंडल या उसकी समितियों के रिकॉर्ड, मीटिंग के कागजात या बातचीत में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जो उनके बयान में उठाए गए मुद्दों का समर्थन करता हो। 

बैंक ने कहा कि गवाहों से पूछताछ में भी चक्रवर्ती के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। विधि कंपनियों ने इस्तीफे के बाद चक्रवर्ती के सार्वजनिक बयानों में ‘दुबई मामले’ के जिक्र की भी जांच की। उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि उन्होंने अपने निजी मूल्यों और नैतिकता से जुड़ी चिंताएं जताई हों या उस मामले या किसी अन्य मुद्दे पर निदेशक मंडल या उसकी समिति के फैसलों से असहमति जताई हो। एचडीएफसी बैंक ने 20 मार्च को अपनी दुबई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र (डीआईएफसी) शाखा में नए ग्राहक जोड़ने में कमियों के कारण तीन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। 

गलत तरीके से बिक्री के आरोपों के बाद, स्थानीय नियामक दुबई वित्तीय सेवा प्राधिकरण ने पिछले साल सितंबर में एचडीएफसी बैंक को अपनी डीआईएफसी शाखा में नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था। एचडीएफसी बैंक ने कानूनी समीक्षा के नतीजों का हवाला देते हुए कहा, ”कुल मिलाकर, जो सबूत देखे गए वे चक्रवर्ती के बयान से मेल नहीं खाते हैं। बाहरी विधि कंपनियों की समीक्षा में उस बयान का कोई ठोस आधार नहीं मिला।” 

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