बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि, एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध समाज के लिए बहुत गंभीर है। नशीली कफ सिरप की अवैध बिक्री और तस्करी करने वाली महिला समेत 4 आरोपियों की अपील को खारिज कर दी है।
साथ ही निचली अदालत से दी गई सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने चारों आरोपियों को 15-15 साल का सश्रम कारावास और डेढ़- डेढ़ लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी। दरअसल, पुलिस ने 13 सितंबर 2023 को मुखबिर की सूचना पर बिलासपुर के तोरवा थाना के हेमूनगर शोभा विहार स्थित योग केंद्र के पास दबिश दी थी।
जहां स्नेहा गोयल, पुष्पेंद्र निर्मलकर, अमर जांगड़े और देवा रजक पकड़े गए। पुलिस ने स्नेहा गोयल के पास से 100 बोतल, पुष्पेंद्र से 25 बोतल, अमर से 30 बोतल और देवा रजक से 20 बोतल नशीली कफ सिरप बरामद की थी। कुल 175 बोतलों के साथ एक कार भी जब्त की गई थी।
ट्रॉयल कोर्ट ने आरोपियों को सुनाई सजा
पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेजने के बाद चार्जशीट पेश किया, जिसके बाद ट्रायल में उन्हें दोषी पाया। जिसके बाद आरोपियों को कोर्ट ने जुर्माने के साथ ही सश्रम कारावास की सजा सुनाई। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ चारों ने हाई कोर्ट में अपील की थी।
पुलिस पर महिला आरोपी से गलत तलाशी का आरोप
अपील में आरोपियों की तरफ से वकील ने तर्क दिया कि महिला आरोपी की तलाशी के समय नियमों का पालन नहीं हुआ। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि बैग या पर्स की तलाशी लेना व्यक्तिगत शरीर की तलाशी नहीं माना जाता, इसलिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के उल्लंघन का सवाल ही नहीं उठता।
चूंकि बरामदगी सार्वजनिक स्थान पर हुई थी, इसलिए पुलिस द्वारा वारंट के बिना धारा 43 के तहत की गई कार्रवाई पूरी तरह वैध है।
हाईकोर्ट ने माना आरोपियों से मिला कोडीनयुक्त सिरप
हाईकोर्ट ने माना कि आरोपियों के पास से कोडीन युक्त सिरप की व्यावसायिक मात्रा मिली थी। स्पेशल कोर्ट, एनडीपीएस एक्ट द्वारा 30 जनवरी 2025 को दिया गया फैसला कानूनी रूप से सही है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि सभी आरोपी फिलहाल जेल में सजा काट रहे हैं।
