नई दिल्ली, एजेंसी। देश 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारी में जुटा है। इस बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को ‘वंदे मातरम् बिल’ को मंज़ूरी दे दी। इसके साथ ही राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रीय गान के जैसा कानूनी संरक्षण मिल गया है। बता दें कि देश की संसद ने पिछले महीने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पास किया था। जिसमें ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में संशोधन किया गया। इस कानून का मकसद ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ जैसी ही कानूनी सुरक्षा देना है।
विधेयक को मिली मंजूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंज़ूरी मिलने के बाद यह विधेयक अब कानून बन गया है। अब ऐसे अपराधों के लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सज़ा हो सकती है। इससे पहले, ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम’ के तहत राष्ट्रीय गान (‘जन गण मन’) को गाने से जानबूझकर रोकना या इसे गाते समय किसी सभा में बाधा डालना मना था। इन अपराधों के लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सज़ा का प्रावधान था। जबकि दूसरी बार और उसके बाद हर बार दोषी पाए जाने पर कम से कम एक साल की जेल की सज़ा होती थी।
पुराने कानून के अनुसार राष्ट्रीय गीत के लिए वैसी सुरक्षा नहीं थी। बिल के मुताबिक ‘वंदे मातरम’ के गायन के अपमान को रोकने के लिए कोई खास कानूनी प्रावधान नहीं है, जबकि इसे राष्ट्रीय गीत का सम्मान प्राप्त है। इसलिए, किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय गीत गाने से जानबूझकर रोकने या ऐसे गायन में लगी किसी सभा में बाधा डालने से रोकने के लिए कानून में संशोधन करके राष्ट्रीय गीत को संरक्षण दिया गयृ है।
लाल किले पर विशेष कार्यक्रम
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। 28 जनवरी के एक आदेश में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत गाने के लिए प्रोटोकॉल का पहला सेट जारी किया। इसमें निर्देश दिया गया कि राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राज्यपालों के भाषण जैसे आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके छह पद गाए जाएंगे, जिनकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी।
