नई दिल्ली, एजेंसी। देशभर में होली दहन होना शुरू हो गया है। गुजरात के गांधीनगर गुरुवार शाम 7 बजे होलिका दहन किया गया। करीब 35 फीट ऊंची होलिका जलाई गई। इसके बाद लोगों ने दौड़-दौड़ कर परिक्रमा लगाई।
वहीं, दोपहर में हिमाचल प्रदेश के मंडी में हजारों की भीड़ ने त्योहार सेलिब्रेट किया है। जमकर रंग-गुलाल उड़ाया गया। मंडी के सेलिब्रेशन का एरिअल व्यू भी सामने आया है।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ होलिका दहन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गोरखपुर पहुंचे। उन्होंने यहां हालिका माता की पूजा की। गोरखपुर सांसद रविकिशन भी उनके साथ मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को होली की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने X पोस्ट में लिखा- आप सभी को होली की ढेरों शुभकामनाएं। हर्ष और उल्लास से भरा यह पावन-पर्व हर किसी के जीवन में नई उमंग और ऊर्जा का संचार करने के साथ ही देशवासियों की एकता के रंग को और प्रगाढ़ करे, यही कामना है।
होली सेलिब्रेशन को लेकर पुलिस भी अलर्ट पर है। क्योंकि होली का त्योहार और रमजान के जुमे की नमाज साथ-साथ है। माहौल न बिगड़ने पाए, इसके लिए उत्तर प्रदेश पुलिस-प्रशासन हाई अलर्ट पर है। यूपी के 18 जिलों में जुमे की नमाज का वक्त बदला गया है। चार जिलों में 189 मस्जिदों को रंग-गुलाल से बचाने के लिए तिरपाल से ढका गया है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
देशभर से होलिका दहन-होली सेलिब्रेशन-सिक्योरिटी की तस्वीरें…
हिमाचल प्रदेश के मंडी में होली के त्योहार सेलिब्रेट करते हुए लोग।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पुलिस अधिकारी मार्च करती हुई।

उत्तराखंड के सीएम धामी देहरादून में होली सेलिब्रेशन कार्यक्रम में शामिल हुए।
दिल्ली में पुलिस के जवान संवेदनशील इलाकों में मार्च पास्ट करते हुए।
होलिका दहन मुहूर्त रात 11.30 से 12:30 तक परंपरा के मुताबिक सूरज ढलते ही होली की पूजा और उसके बाद दहन किया जाता है। लेकिन आज शाम को भद्रा का अशुभ समय रहेगा। इस वक्त होली की पूजा तो कर सकते हैं, लेकिन होली जलाने का मुहूर्त रात 11.30 से 12:30 तक रहेगा।
ग्रंथों के अनुसार सतयुग के बाद त्रेतायुग में श्रीराम ने होली खेली, द्वापर में श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ होली खेली थी। अधिकतर लोगों को होलिका और प्रहलाद की कहानी ही पता है, लेकिन इस उत्सव से जुड़ी कुछ और मान्यताएं भी हैं। एक मान्यता कामदेव से जुड़ी है तो दूसरी ढोंढा नाम की राक्षसी से। ये मान्यताएं विष्णु पुराण, शिव पुराण और भविष्य पुराण में बताई गई हैं।
