रायपुर,एजेंसी। रायपुर में 23 जनवरी से लागू होने जा रहे पुलिस कमिश्नरी सिस्टम का दायरा सीमित करने के साथ ही कमिश्नर के अधिकारों में भी कटौती की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित भोपाल के सिस्टम को ही रायपुर में लागू किया जा रहा है, जबकि कमेटी ने भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम की अनुशंसा की है।
क्योंकि भुवनेश्वर के पास 22 से ज्यादा व मजिस्ट्रियल अधिकार है, जो पहले जिला प्रशासन के पास थे, जबकि भोपाल पुलिस के पास 10-12 अधिकार ही दिए गए हैं। वहां पूरा अधिकार अभी भी जिला प्रशासन के पास है। इसी व्यवस्था को रायपुर में लागू करने की तैयारी है।
दरअसल, रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू करने के लिए शासन ने पिछले वर्ष एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में 8 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने मुंबई, दिल्ली, नागपुर, कानपुर, वाराणसी, जयपुर, भुवनेश्वर और भोपाल के पुलिस कमिश्नरी सिस्टम का अध्ययन किया।
रायपुर की भौगोलिक स्थिति, आबादी, पुलिस बल और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर एक व्यवहारिक, कम खर्चीला और प्रभावी मॉडल तैयार कर रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी गई। इस रिपोर्ट में भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को रायपुर के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया है और उसी की अनुशंसा की गई थी।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस कमिश्नर को 22 मजिस्ट्रियल अधिकार देने का प्रस्ताव रखा था, जो वर्तमान में प्रशासन के पास हैं। इनमें छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, सार्वजनिक उपद्रव रोकने के लिए धारा 133 और गिरफ्तारी से संबंधित धारा 145 जैसे महत्वपूर्ण अधिकार शामिल थे।
विस्तार से समझें… भुवनेश्वर और भोपाल पुलिस कमिश्नरी में क्या है अंतर
भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम
ओडिशा सरकार ने भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नर को 22 से अधिक अधिकार दिए हैं, जो पहले जिला प्रशासन के पास थे। कमिश्नर गन का लाइसेंस जारी करते हैं। आबकारी से जुड़े लाइसेंस जारी करने का अधिकार भी उनके पास है। जिला बदर, एनएसए की कार्रवाई समेत कई बड़े अधिकार दिए गए हैं। भुवनेश्वर के पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू है।
भोपाल पुलिस कमिश्नरी सिस्टम
मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को सीमित अधिकार दिए हैं। यहां अधिकांश अधिकार आज भी जिला प्रशासन के पास ही हैं। गन लाइसेंस और आबकारी लाइसेंस जारी करने का अधिकार पुलिस कमिश्नर को नहीं है। केवल धारा 144 लागू करना, धारा 151, 107, 116 की कार्रवाई और जिलाबदर जैसे करीब 10 अधिकार ही दिए गए हैं।
नए कानून में जो अधिकार, वही देने की तैयारी
सरकार पुलिस कमिश्नर को 10 अधिकार देने जा रही है। ये वही अधिकार हैं, जो नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 15 में दिए गए हैं। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के जोर देने के बावजूद छत्तीसगढ़ में इन्हें पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। नया कानून पुलिस को मजिस्ट्रेट के अधिकार देता है। इन्हीं अधिकारों को पुलिस कमिश्नर को देने की तैयारी की जा रही है।
इनके अधिकारों में कटौती नहीं…
पुलिस के कुछ अधिकार कमिश्नर को मिलते हैं, पर प्रशासनिक शक्तियां बरकरार रहती हैं। कलेक्टर और एसडीएम विकल्प बने रहते हैं।
कमेटी ने ये 22 अधिकार देने की अनुशंसा की थी
- छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम 2007
- कैदी अधिनियम 1900
- विष अधिनियम 1919
- अनैतिक व्यापार (रोकथाम) एक्ट 1956
- मोटर वाहन अधिनियम 1988
- गैरकानूनी गतिविधियां एक्ट 1967
- छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990
- आधिकारिक गोपनीयता एक्ट 1923
- पशु अतिक्रमण अधिनियम 1871
- राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980
- पुलिस (असंतोष भड़काने) एक्ट 1922
- पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960
- विदेशी अधिनियम 1946
- भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885
- राजद्रोह सभाओं की रोकथाम एक्ट 1911
- कैदियों की पहचान अधिनियम 1920
- पेट्रोलियम अधिनियम 1934
- सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952
- शस्त्र अधिनियम 1959
- विस्फोटक अधिनियम 1884
- छत्तीसगढ़ उत्पाद शुल्क अधिनियम 1915
- कालाबाजारी निवारण एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का रखरखाव अधिनियम 1980
पर ये अधिकार देने की तैयारी
वेश्यावृत्ति के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकेगी।
गिरफ्तार व्यक्ति को बॉन्ड ओवर करना।
शांति-व्यवस्था भंग होने पर कर्फ्यू लगाने का अधिकार।
अपराधी और गुंडों को जिलाबदर करने का अधिकार।
शस्त्र अधिनियम के तहत लाइसेंस जारी कर सकेंगे।
प्रतिबंधात्मक धारा 144 भी लागू कर सकेंगे।
बार-बार एक्सीडेंट करने पर लाइसेंस निरस्त।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980
