DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

पेट्रोल पंपों के नीचे बने टैंकों में कितना लिटर भरा होता है तेल, कितने दिन निकाल देता है स्टॉक

मुंबई, एजेंसी। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच गहराते अंतरराष्ट्रीय विवादों की तपिश अब भारतीय बाजारों तक पहुंचने लगी है. हाल ही में सोशल मीडिया पर पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैली एक अफवाह ने देशभर के पेट्रोल पंपों पर हड़कंप मचा दिया. स्थिति यह हो गई कि लोग घबराहट में अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए. हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों ने इस पूरी स्थिति पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है. सरकारी बयान के अनुसार, देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है.

अचानक बढ़ी इस भीड़ का मुख्य कारण ‘पैनिक बाइंग’ यानी डर के कारण की गई खरीदारी है. जब लोग जरूरत से ज्यादा तेल खरीदने लगे, तो पंपों का दैनिक स्टॉक समय से पहले समाप्त होने लगा, जिससे भ्रम की स्थिति और गंभीर हो गई. असल में, भारत में ईंधन के भंडारण और वितरण की व्यवस्था बेहद मजबूत है.

तीन दिनों का रिजर्व स्टॉक रखना अनिवार्य
 पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) के कड़े नियमों के तहत, हर पेट्रोल पंप को अपनी औसत बिक्री के आधार पर कम से कम तीन दिनों का रिजर्व स्टॉक रखना अनिवार्य होता है। यह नियम इसीलिए बनाया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति या सप्लाई चेन में रुकावट आने पर भी जनता को परेशानी न हो।

आमतौर पर पेट्रोल पंपों के नीचे बने टैंकों की क्षमता 15,000 से लेकर 45,000 लीटर तक होती है, जो उनकी लोकेशन और मांग पर निर्भर करती है। रिफाइनरियों से इन पंपों तक ईंधन पहुंचाने के लिए 12,000 से 20,000 लीटर की क्षमता वाले विशेष टैंकरों का इस्तेमाल किया जाता है. यह पूरा तंत्र ‘पेट्रोलियम नियम 2002’ के अधीन काम करता है, जिसकी निगरानी इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी बड़ी कंपनियां करती हैं. सरकार ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह कायम है, इसलिए नागरिकों को सोशल मीडिया पर चल रही बिना सिर-पैर की खबरों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

Exit mobile version