बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अरपा नदी में 3 बहनों की डूबने से मौत, अवैध खुदाई से जगह-जगह बने गड्ढों में डूबने से हो रही मौतों पर खुद संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार को कमेटी बनाने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि उद्गम स्थलों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करें।
साथ ही हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ की 19 नदियों की बदहाली पर गंभीरता दिखाई है। सरकार को इसके लिए शपथपत्र के साथ जानकारी देने को कहा है। नदियों के उद्गम स्थल को नाला बताने पर नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में केस की सुनवाई हुई। केस की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।

हाईकोर्ट ने शासन से कहा है कि छत्तीसगढ़ की नदियों को संरक्षित करने कमेटी बनाएं।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, अरपा नदी के संरक्षण को लेकर एडवोकेट अरविंद शुक्ला और रामनिवास तिवारी ने अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इनमें अरपा नदी के उद्गम स्थल के संरक्षण, प्रदूषण की रोकथाम और अवैध खनन पर कठोर कदम उठाने की मांग की गई है।
इसके साथ ही अरपा अर्पण महाअभियान समिति ने भी याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि प्रतिबंध के बावजूद अरपा नदी में कई जगहों पर खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है। इसके साथ ही 17 जुलाई 2023 को अरपा नदी में डूबने से 3 बहनों की मौत की भी जानकारी दी गई।
याचिकाकर्ताओं ने चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच को बताया कि 3 साल पहले अरपा नदी में सेंदरी के पास गड्ढे में डूबने से तीन लड़कियों की मौत हो गई थी। बारिश के दिनों में खनन से बन गहरे गड्ढे की वजह से जान गई थी। इस पर भी हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है।
अरपा नदी में सेंदरी के पास गड्ढे में डूबने से तीन लड़कियों की मौत हो गई थी। इसके बाद लोगों की भीड़ उमड़ी थी।
उद्गम स्थल संरक्षित करने नहीं बनी है कमेटी- छत्तीसगढ़ सरकार
डिवीजन बेंच में केस की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि अरपा नदी के संरक्षण के लिए भागवत कमेटी का गठन किया गया था, जो उद्गम स्थल को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय थी। इस पर शासन ने माना कि अरपा नदी के लिए कमेटी का गठन किया गया है, लेकिन अन्य नदियों के लिए ऐसी कोई समिति नहीं बनाई गई है।
इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी नदियों के उद्गम स्थलों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए और उनके संरक्षण हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।
उद्गम स्थलों को बताया नाला, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में अधिकांश नदियों के उद्गम स्थलों को नाले के रूप में दिखाया गया है, जो कि असंगत और आपत्तिजनक है। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह स्थिति तुरंत सुधारी जानी चाहिए।
सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान यह भी बताया कि जीपीएम (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) जिले के कलेक्टर ने अरपा नदी के उद्गम स्थल की पहचान के लिए लायडर सर्वे का प्रस्ताव सरकार को भेजा था, जिसकी लागत करीब 2 करोड़ 60 लाख रुपए थी। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही कहा कि ऐसे कार्यों के लिए अत्यधिक खर्च की बजाय स्थानीय और व्यावहारिक समाधान खोजे जाने चाहिए।
