नई दिल्ली, एजेंसी। उस दिन दिवाली वाला माहौल था। ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर में इंडियन कॉन्सुलेट ने कैंप लगाया था। इस कैंप में लाइफ सर्टिफिकेट पर स्टैम्प लगाई जाती है। ये सर्टिफिकेट उन लोगों के पास होते हैं, जिनकी पेंशन भारत सरकार की तरफ से आती है।’
‘उसी वक्त मंदिर के बाहर खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन कर रहे थे। लोग मंदिर से बाहर निकले, तो प्रदर्शनकारियों ने हमारे हिंदू भाई, महिलाओं और बच्चों पर हमला कर दिया। वे मंदिर में घुस गए।’
नरेश कुमार कनाडा सनातन मंदिर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के ट्रस्टी हैं। हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स से भी जुड़े हैं। 3 नवंबर को ब्रैम्पटन के मंदिर में लोगों पर खालिस्तान समर्थकों के हमले के बाद दैनिक भास्कर ने उनसे बात की।
नरेश बताते हैं कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पिछले तीन-चार साल से कनाडा में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। खालिस्तान समर्थक, मंदिर के ट्रस्टियों को धमकी भरे मैसेज भेज रहे हैं।
हमने नरेश के अलावा कनाडा में रह रहे कुछ और लोगों से भी बात की। पता चला कि ब्रैम्पटन की तरह ही कनाडा के दूसरे शहरों में भी उसी दिन ऐसी घटनाएं हुई थीं। सरे और कैलगरी में मंदिरों पर हमले की कोशिश की गई। मिसिसागा में गुरुद्वारे पर हमले की तैयारी थी। एक दिन पहले 2 नवंबर को वैंकूवर में गुरुद्वारे के बाहर प्रदर्शन हुआ था। पुलिस को शक है इन सभी घटनाओं में कनेक्शन हो सकता है।
