गुजरात,एजेंसी। उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो सकता है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को मसौदा तैयार करने के लिए 5 सदस्यीय कमेटी की घोषणा की।
सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा कमेटी में 4 सदस्य होंगे। कमेटी 45 दिनों में राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर UCC लागू करने का फैसला लिया जाएगा।
एक अधिकारी के मुताबिक, समिति रिपोर्ट तैयार करने के लिए मुस्लिम समुदाय और दूसरे धार्मिक नेताओं से भी मुलाकात करेगी। गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा- UCC लागू होने पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा होगी।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जहां 27 जनवरी को UCC लागू किया गया। CM पुष्कर सिंह धामी ने UCC पोर्टल और नियम लॉन्च किया था। उन्होंने कहा था कि उत्तराखंड में UCC लागू करके हम संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
जपा सरकार जो कहती है, वह करती है: भूपेंद्र पटेल
CM पटेल ने कहा- जब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, प्रधानमंत्री मंत्री महोदय ने देश के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव रखा है।
उन्होंने कहा कि इसे पूरे देश में लागू करने का निर्णय लिया गया है। भाजपा सरकार जो कहती है, वह करती है। एक राष्ट्र एक चुनाव, अनुच्छेद 370, तीन तलाक कानून आदि को लेकर किए गए वादे एक के बाद एक पूरे किए गए हैं।
अब समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया गया है। गुजरात अपने संकल्प को पूरा करने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। यह राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और विशेषाधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा- UCC संविधान की भावना है जो कि समरसता एवं समानता स्थापित करेगा। गुजरात के सभी नागरिकों को एक समान अधिकार मिले इसके लिए मुख्यमंत्री ने एक कमेटी बनाई है।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं रंजना प्रकाश देसाई
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं। वह 13 सितम्बर 2011 से 29 अक्टूबर 2014 तक सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहीं।
रंजना देसाई ने 1970 में एलफिंस्टन कॉलेज, मुंबई से स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से विधि स्नातक (बीए एलएलबी) की परीक्षा उत्तीर्ण की।
जस्टिस रंजना देसाई जम्मू-कश्मीर पर परिसीमन आयोग की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। देसाई सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की जज भी रह चुकी हैं।
