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एसईसीएल मुख्यालय में एमएमडीआर अधिनियम के अंतर्गत अधिकृत अधिकारियों हेतु चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) मुख्यालय, बिलासपुर स्थित प्रबंधन विकास संस्थान (MDI) में खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर एक्ट) की धारा 22, 23बी एवं 24 के अंतर्गत अधिकृत एसईसीएल अधिकारियों के लिए चार दिवसीय जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

भारत सरकार द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार एसईसीएल, सीआईएसएफ, टीएसआर तथा मध्यप्रदेश राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ़) के अधिकारियों को एमएमडीआर अधिनियम की उक्त धाराओं के अंतर्गत अवैध कोयला खनन एवं कोयला चोरी के मामलों में कार्रवाई हेतु अधिकृत किया गया है। इस प्रावधान के तहत अधिकृत अधिकारी न्यायालय में सीधे परिवाद प्रस्तुत कर सकेंगे, जिससे कोयला चोरी एवं अवैध खनन से संबंधित मामलों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण में सहायता मिलेगी।

इस चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु झारखंड पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक (आईजी) एवं सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी विपुल शुक्ला को विषय विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया है। वर्तमान में वे बीसीसीएल में वरिष्ठ सलाहकार (सुरक्षा) के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान वे प्रतिभागियों को एमएमडीआर अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, अवैध खनन एवं खनिज परिवहन से संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई, जांच प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन तथा सुदृढ़ अभियोजन प्रतिवेदन (Strong Prosecution Report) तैयार करने के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे।

23 जून से 26 जून 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न बैचों में एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी, क्षेत्रीय सुरक्षा नोडल अधिकारी, महाप्रबंधक, अभिकर्ता (एजेंट), प्रबंधक, मानव संसाधन विभाग एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, सीआईएसएफ, टीएसआर तथा एसआईएसएफ (मध्यप्रदेश) के कार्मिक सहभागिता कर रहे हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य एमएमडीआर अधिनियम के अंतर्गत अधिकृत अधिकारियों को उनके अधिकारों, दायित्वों एवं कानूनी प्रक्रियाओं के संबंध में जागरूक करना तथा अवैध खनन एवं कोयला चोरी की रोकथाम से संबंधित मामलों में उनकी कार्यकुशलता को और सुदृढ़ बनाना है।

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