नई दिल्ली ,एजेंसी। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद जिस तरह से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया है, वह सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी एक ठोस कदम माना जा रहा है। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने दुनिया के 33 देशों में बहुपक्षीय प्रतिनिधिमंडल भेजे थे, जिनका मकसद था भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को दुनिया के सामने रखना और वैश्विक समर्थन जुटाना। इन प्रतिनिधिमंडलों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद, वरिष्ठ नेता और अनुभवी राजनयिक शामिल थे। यह भारत की राजनीतिक एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए साझा दृष्टिकोण का उदाहरण है। अब ये सभी प्रतिनिधि अगले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और उन्हें अपनी विदेश यात्राओं के अनुभव व उपलब्धियों की जानकारी देंगे।
9 या 10 जून को हो सकती है पीएम मोदी से अहम बैठक
सूत्रों के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण बैठक 9 या 10 जून को नई दिल्ली में आयोजित हो सकती है। इसमें प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य प्रधानमंत्री को विस्तार से बताएंगे कि किन-किन देशों में उन्होंने बैठकें कीं, किन स्तरों पर बातचीत हुई और पहलगाम हमले तथा आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृष्टिकोण पर कैसी वैश्विक प्रतिक्रिया रही।
सात प्रतिनिधिमंडल, सात बड़े चेहरे: संसद की साझा आवाज
भारत सरकार ने इस बार प्रतिनिधिमंडलों के चयन में सर्वदलीय भावना को प्राथमिकता दी। कुल सात प्रतिनिधिमंडलों का गठन किया गया और हर प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसी प्रमुख सांसद को सौंपा गया। इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं को शामिल किया गया:
- शशि थरूर – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

