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डिजिटल धोखाधड़ी में भारतीय ग्राहकों को वैश्विक औसत से 36% ज़्यादा नुकसान

मुंबई, एजेंसी। भारतीय ग्राहकों को डिजिटल धोखाधड़ी से होने वाला नुकसान पूरे वैश्विक औसत से 36 प्रतिशत अधिक है। एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। हालांकि, पिछले साल डिजिटल धोखाधड़ी के संदिग्ध मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी लेकिन इसके बावजूद नुकसान वैश्विक स्तर में कहीं अधिक हैं। 

ट्रांसयूनियन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हुए उपभोक्ताओं को पिछले एक वर्ष में औसतन 2,265 अमेरिकी डॉलर (करीब 2.04 लाख रुपये) का नुकसान हुआ, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 1,671 डॉलर रहा। वहीं, भारत में संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी की दर 2025 में घटकर 7.1 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले 13.1 प्रतिशत थी। यह गिरावट डिजिटल साक्षरता, ग्राहकों को जागरूक करने, मोबाइल नंबर सत्यापन और साइबर खुफिया जानकारी साझा करने जैसे सरकारी और उद्योग जगत की कोशिशों का नतीजा है। इसके बावजूद भारत में यह दर वैश्विक औसत 3.8 प्रतिशत की तुलना में लगभग दोगुनी बनी हुई है, जो साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बने रहने का संकेत देती है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त से दिसंबर 2025 के बीच 59 प्रतिशत भारतीय उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें किसी न किसी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी का निशाना बनाया गया। इनमें से 13 प्रतिशत लोग वास्तव में धोखाधड़ी का शिकार हुए, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 10 प्रतिशत रहा। भारतीय उपभोक्ताओं को निशाना बनाने वाली सबसे आम धोखाधड़ी में जालसाज फर्जी ई-मेल, वेबसाइट या संदेशों के जरिये लोगों की व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश शामिल रही। इसके अलावा विशिंग (फोन कॉल के माध्यम से धोखाधड़ी), स्मिशिंग (फर्जी एसएमएस के जरिए ठगी) आदि भी मुख्य रहे। 

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