DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

DMF धांधली की जांच, कलेक्ट्रेट पहुंचे दर्जनों ग्रामीण और जनप्रतिनिधि, जांच समिति के समक्ष खोली अनियमितताओं की पोल

कोरबा। जिला खनिज न्यास मद (DMF) में नियमों के विरुद्ध राशि के आवंटन और दुरुपयोग की जांच करने पहुंची तीन सदस्यीय समिति के सामने आज शिकायतों का अंबार लग गया, बिलासपुर हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद गठित इस समिति ने आज कोरबा कलेक्ट्रेट में याचिकाकर्ताओं और प्रभावित ग्रामीणों के बयान दर्ज किए ।

विस्तृत जनभागीदारी और विरोध

​सुनवाई के दौरान न केवल मुख्य याचिकाकर्ता बल्कि बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। याचिकाकर्ताओं लक्ष्मी चौहान, सपुरन कुलदीप और अजय श्रीवास्तव सहित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने समिति को बताया कि किस तरह प्रभावितों के हक के पैसे का बंदरबांट किया जा रहा है ।

​शिकायत दर्ज कराने वालों में प्रमुख रूप से शामिल थे

​जनप्रतिनिधि:- बसन्त कुमार कंवर (जनपद सदस्य, कटघोरा) अनिल टंडन (जनपद सदस्य, पाली)
​ग्राम सरपंच:- गौरी बाई (बेलटिकरी) विष्णु बिंझवार (रलिया) और लोकेश कंवर (हरदीबाजार)
​समिति एवं ग्रामीण प्रतिनिधि:- रुद्र दास महंत (नराई बोध) सतीश कुमार (भैरोताल) देवेंद्र कुमार (पुनर्वास ग्राम गंगानगर)
​इसके अलावा दर्जन भर अन्य ग्रामीणों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए डीएमएफ फंड के बंदरबांट पर कड़ा विरोध जताया ।

​प्रभावित गांवों की अनदेखी का आरोप

​ग्रामीणों ने समिति को अवगत कराया कि कोयला खदान क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित 43 गांवों की स्थिति दयनीय है विशेष रूप से उन 13 गांवों का मुद्दा उठाया गया जिन्हें 7 साल पहले आदर्श गांव’ घोषित किया गया था लेकिन आज तक वहां कोई बुनियादी विकास कार्य नहीं हुआ शिकायतकर्ताओं ने मांग की कि नियम विरुद्ध किए जा रहे कार्यों को तत्काल रोका जाए और फंड का उपयोग केवल भूविस्थापितों के कल्याण के लिए किया जाए ।

​समिति की कार्यवाही और कोर्ट का रुख

​उपायुक्त विकास हरिशंकर चौहान उपायुक्त राजस्व स्मृति तिवारी और लेखा अधिकारी स्मिता पांडे की समिति इन सभी शिकायतों का संकलन कर रही है समिति को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है ​यह मामला अब राजनीतिक के साथ-साथ कानूनी रूप से भी बेहद संवेदनशील हो चुका है हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई 30 जनवरी को निर्धारित की है अब देखना यह होगा कि जांच समिति की रिपोर्ट में किन अधिकारियों और ठेकेदारों पर गाज गिरती है ।

Exit mobile version