DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

ईरान का खुला ऐलान: अब होर्मुज से नहीं गुजरेंगे दुश्मनों के हथियार, ‘फ्रीडम प्रोजेक्ट’ जहाजों पर लगेगी रोक

तेहरान, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया को बड़ी चेतावनी दी है। Mohammad Reza Aref ने कहा है कि अब ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से “दुश्मन देशों” के हथियार और सैन्य उपकरणों को गुजरने की अनुमति नहीं देगा। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, आरिफ ने कहा कि पहले ईरान ने अपनी संप्रभुता के अधिकार में ढील देते हुए उन सैन्य उपकरणों को भी गुजरने दिया था जो बाद में उसके खिलाफ इस्तेमाल किए गए। लेकिन अब ऐसा दोबारा नहीं होने दिया जाएगा। उधर, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख Ebrahim Azizi ने बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए एक “प्रोफेशनल मैकेनिज्म” तैयार किया है। इसके तहत एक निर्धारित समुद्री मार्ग बनाया जाएगा, जिसकी घोषणा जल्द की जाएगी।

ईरान का कहना है कि इस नए सिस्टम का फायदा केवल व्यापारिक जहाजों और ईरान के साथ सहयोग करने वाले देशों को मिलेगा। वहीं तथाकथित “फ्रीडम प्रोजेक्ट” यानी अमेरिका से जुड़े ऑपरेटरों को इस मार्ग का इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा। ईरान इस प्रक्रिया के तहत विशेष सेवाओं के लिए शुल्क भी वसूलेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चीन यात्रा के बाद दावा किया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करता है। ट्रंप ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping भी इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए।

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण पिछले ढाई हफ्तों में ईरान को प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई और तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। फरवरी में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। हालांकि अप्रैल में दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन मौजूदा बयानबाजी ने फिर से हालात को विस्फोटक बना दिया है।

Exit mobile version