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इजराइल चुनाव- नेतन्याहू-आइजनकोट गठबंधन में कड़ी टक्कर:सिर्फ 5 सीटों का अंतर, अरब पार्टियां 19 सीटों पर आगे, ये इतिहास में सबसे ज्यादा

तेल अवीव, एजेंसी। इजराइल में चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है। अब तक 85.6% वोट गिने जा चुके हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटों पर आगे चल रहा है। दोनों के बीच सिर्फ 5 सीटों का अंतर है।

अरब पार्टियों की जॉइंट लिस्ट 12 और राअम 7 सीटों पर आगे हैं, दोनों को मिलाकर 19 सीटें हो रही हैं। जो इजराइल के चुनावी इतिहास में अरब पार्टियों का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा। इससे पहले 2020 के चुनाव में इन पार्टियों ने 15 सीटें जीती थीं।

इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। अभी नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों बहुमत से दूर हैं। ऐसे में अरब पार्टियों का समर्थन सरकार बनाने में अहम हो सकता है। चुनाव से पहले सर्वे में नेतन्याहू की हार का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब तक की गिनती में मुकाबला कड़ा बना हुआ है।

इजराइल में सरकार बनाने के लिए 42 दिन मिलेंगे

इजराइल में सरकार बनाने के लिए चुने गए नेता को शुरुआत में 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इसे 14 दिन और बढ़ा सकते हैं। यानी सरकार बनाने के लिए कुल 42 दिन मिल सकते हैं।

इस दौरान नेता को दूसरी पार्टियों से बातचीत कर समर्थन जुटाना होता है। इसके लिए पार्टियों के बीच नीतियों और मंत्रिपदों को लेकर समझौते हो सकते हैं।

सरकार बनाने के लिए आम तौर पर संसद में 61 सीटों का समर्थन जरूरी होता है। अगर नेता 61 सीटों का समर्थन नहीं जुटा पाता, तो वह छोटी पार्टियों के सहयोग से अल्पमत सरकार बनाने या दो नेताओं के बीच बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने का समझौता करने की कोशिश भी कर सकता है।

राष्ट्रपति बोले- नई सरकार के लिए सभी दल बातचीत करें

इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सभी राजनीतिक दलों से नई सरकार बनाने के लिए बातचीत करने और दोबारा चुनाव से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी दलों को खुले मन से चर्चा करनी चाहिए। चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है।

हर्जोग ने कहा कि अगले हफ्ते चुनाव के आधिकारिक नतीजे मिलने के बाद वे संसद में सभी दलों से बातचीत शुरू करेंगे। उन्होंने चुनाव में रिकॉर्ड मतदान की भी तारीफ की।

स्पीकर को हटाने की तैयारी में जुटा आइजनकोट खेमा

इजराइल में गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी खेमा संसद अध्यक्ष अमीर ओहाना को पद से हटाने की तैयारी कर रहा है। चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए विपक्षी खेमा अरब पार्टियों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। ओहाना प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सदस्य हैं।

संसद अध्यक्ष पद के लिए अभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यिस्राइल बेतेनु पार्टी के सांसद ओदेद फोरर और आइजनकोट की याशर पार्टी के एलेजर स्टर्न के नामों पर चर्चा हो रही है।

तस्वीर इजराइली संसद के स्पीकर अमीर ओहाना की है।

EU ने इजराइल के चुनाव की तारीफ की

यूरोपीय संघ (EU) ने इजराइल में हुए चुनाव के बाद वहां के लोगों को बधाई दी है। EU ने करीब 78% मतदान की तारीफ करते हुए इसे इजराइल के मजबूत लोकतंत्र की निशानी बताया। EU ने कहा कि वह इजराइल में नई सरकार बनने के बाद उसके साथ बेहतर रिश्ते बनाना चाहता है।

EU के प्रवक्ता ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद दोनों पक्ष मिलकर काम करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि EU और इजराइल के बीच लंबे समय से रिश्ते हैं और दोनों लोकतंत्र में भरोसा करते हैं।

कुछ ही देर में चुनाव के पूरे नतीजे जारी होंगें

केंद्रीय चुनाव समिति ने सभी सामान्य मतों की गिनती पूरी कर ली है। समिति ने बताया कि कुछ ही देर में चुनाव के पूरे नतीजे जारी कर दिए जाएंगे।

इन नतीजों में सभी सामान्य मतों की गिनती शामिल होगी। हालांकि, डबल लिफाफे में आने वाले मतों की गिनती अभी बाकी है। यह गिनती आज रात शुरू होगी।

इजराइली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के सामने मुश्किल फैसला

इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग की भूमिका आमतौर पर औपचारिक होती है। लेकिन आम चुनाव के बाद उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें तय करना होता है कि किस नेता को सरकार बनाने का मौका दिया जाए।

राष्ट्रपति के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी के नेता को ही चुने। वह उस नेता को भी मौका दे सकते हैं, जिसके पास दूसरी पार्टियों का समर्थन जुटाकर संसद में बहुमत साबित करने की ज्यादा संभावना हो।

इजराइली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने बुधवार को पत्नी के साथ वोटिंग की।

2009 में राष्ट्रपति शिमोन पेरेज ने बेंजामिन नेतन्याहू को सरकार बनाने का मौका दिया था, जबकि उनकी लिकुड पार्टी को कदीमा पार्टी से कम वोट मिले थे।

इस बार राष्ट्रपति के सामने क्या चुनौती है?

बुधवार को आए शुरुआती एग्जिट पोल में नेतन्याहू गठबंधन और विपक्षी गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला दिखा। हालांकि, शुरुआती नतीजों में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को सबसे ज्यादा वोट मिलते दिख रहे हैं। ऐसे में नेतन्याहू दावा कर सकते हैं कि सरकार बनाने का पहला मौका उन्हें मिलना चाहिए।

हालांकि चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करना ही प्रधानमंत्री बनने के लिए काफी नहीं है। राष्ट्रपति को यह देखना होगा कि कौन-सा नेता अलग-अलग पार्टियों का समर्थन जुटाकर संसद में बहुमत साबित कर सकता है।

जिन इलाकों में जंग का असर, वहां भी नेतन्याहू आगे

इजराइल में चुनाव के शुरुआती नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड उन शहरों में भी आगे है, जहां जंग के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। इनमें लेबनान की सीमा के पास बसा किरयात शमोना और दक्षिणी इजराइल के स्देरोत और ओफाकिम शहर शामिल हैं।

किरयात शमोना में दोपहर 12:30 बजे तक करीब 48% वोट नेतन्याहू की पार्टी को मिले। वहीं, स्देरोत में करीब 39% लोगों ने उनकी पार्टी को वोट दिया।

जंग के दौरान इन शहरों पर रॉकेट और ड्रोन से हमले हुए थे। कई लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह रहना पड़ा था।

जिस पार्टी को ज्यादा वोट, उसे ज्यादा सीटें

इजराइल में लोग किसी नेता को नहीं, बल्कि उसकी पार्टी को वोट देते हैं। चुनाव से पहले हर पार्टी अपने उम्मीदवारों की एक सूची बनाती है। पूरे देश में पार्टी को मिले वोटों के आधार पर तय होता है कि उसे संसद में कितनी सीटें मिलेंगी।

लेकिन संसद में सीट पाने के लिए एक शर्त है। किसी पार्टी को कुल वैध वोटों में से कम से कम 3.25% वोट हासिल करने होते हैं। इससे कम वोट मिलने पर पार्टी को संसद में कोई सीट नहीं मिलती।

पार्टी के कौन से उम्मीदवार सांसद बनेंगे, इसका फैसला उम्मीदवारों की लिस्ट से होता है। हर पार्टी चुनाव से पहले अपने उम्मीदवारों की एक लिस्ट जारी करती है। अगर किसी पार्टी को 20 सीटें मिलती हैं, तो लिस्ट में पहले 20 नंबर पर मौजूद उम्मीदवार सांसद बन जाएंगे।

वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों को वोट देने का अधिकार नहीं

इजराइल के चुनाव का असर वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों की जिंदगी पर भी पड़ता है, लेकिन उन्हें इन चुनावों में वोट देने का अधिकार नहीं है। कई फिलिस्तीनियों ने इस पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वेस्ट बैंक पर इजराइल का कब्जा लगातार मजबूत होता जा रहा है और वहां उनकी जिंदगी से जुड़े फैसले इजराइली सरकार लेती है।

वेस्ट बैंक में दुकान चलाने वाले 32 साल के मोंटासेर अमरो ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कहा, “इजराइली सरकार का हमारी जिंदगी पर बहुत बड़ा नियंत्रण है। वह तय करती है कि सड़क पर लगे बैरिकेड कब खुलेंगे और कब बंद होंगे। सीमाओं पर उसका नियंत्रण है और वह यह भी तय करती है कि हमारी अर्थव्यवस्था का कितना हिस्सा काम कर पाएगा।”

अमरो ने सवाल उठाया, “जब कुछ सौ मीटर दूर रहने वाले यहूदी बस्तियों के लोग वोट दे सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?”

वेस्ट बैंक की यहूदी बस्ती में रहने वाले इजराइली चुनाव में वोट डालते हैं।

इजराइल ने 1967 में वेस्ट बैंक पर कब्जा कर लिया था। 1990 के दशक में उसने फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के साथ समझौता किया, जिसके तहत फिलिस्तीनी अथॉरिटी बनाया गया। यह वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों का प्रशासन संभालता है। हालांकि, फिलिस्तीनी अथॉरिटी में करीब 20 साल से संसदीय या राष्ट्रपति चुनाव नहीं हुए हैं।

कई फिलिस्तीनी लंबे समय से उम्मीद करते रहे हैं कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी आगे चलकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश का रूप लेगा। लेकिन हाल के वर्षों में यह उम्मीद कमजोर हुई है।

इजराइल चुनाव में अरब पार्टियों का दमदार प्रदर्शन

एग्जिट पोल के नतीजे घोषित होने पर इजराइल के अरब नेतृत्व वाले जॉइंट लिस्ट गठबंधन के समर्थक खुशी मनाते हुए।

चुनाव में दो प्रमुख अरब पार्टियों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इन पार्टियों के समर्थक बड़ी संख्या में वोट डालने पहुंचे। उन्होंने जॉइंट लिस्ट को संसद में अब तक की सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। ऐसे में अगली सरकार बनाने में इनकी भूमिका अहम हो सकती है।

राअम के नेता मंसूर अब्बास ने एक टीवी चैनल से कहा कि मतदान में बड़ी संख्या में अरब नागरिकों की भागीदारी दिखाती है कि उन्होंने अपनी निराशा और हताशा को उम्मीद में बदल दिया है। इजराइल की कुल आबादी में अरब नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 20% है।

जॉइंट लिस्ट के नेता बोले- नेतन्याहू सरकार को हटाने में मदद के लिए तैयार

यूसुफ जबरीन हदाश पार्टी के नेता हैं। वे जॉइंट लिस्ट गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं।

जॉइंट लिस्ट गठबंधन के अध्यक्ष यूसुफ जबरीन ने कहा है कि उनका गठबंधन सत्ता में बदलाव लाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू सरकार को हटाने की कोशिश करने वाली किसी भी पार्टी को उनसे बात करनी होगी।

जबरीन ने कहा कि इजराइल के सामने दो रास्ते हैं- यहूदी वर्चस्व को जारी रखना या यहूदियों और अरब नागरिकों के बीच सहयोग कायम करना।

अरब नेतृत्व वाली दो पार्टियों- जॉइंट लिस्ट और राअम को मिलाकर 19 सीटें मिलने का अनुमान है। इनमें जॉइंट लिस्ट को 13 और राअम को 6 सीटें मिलती दिख रही हैं। यह अरब पार्टियों के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा हो सकता है।

76.8% वोटों की गिनती पूरी, नेतन्याहू गठबंधन 54 पर आगे

76.8% वोटों की गिनती हो चुकी है। चुनाव आयोग के नतीजों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 54 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 47 सीटें मिलने का अनुमान है।

अरब पार्टियों जॉइंट लिस्ट और राअम की कुल सीटें बढ़कर 19 हो गई हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को 120 सदस्यीय संसद में कम से कम 61 सीटों की जरूरत है। फिलहाल दोनों मुख्य गठबंधन बहुमत के आंकड़े से नीचे हैं।

चुनाव के नतीजों से शेकेल कमजोर, 0.75% गिरा

इजराइल में चुनाव के नतीजे स्पष्ट नहीं होने का असर देश की मुद्रा शेकेल पर भी पड़ा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शेकेल की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। सुबह के कारोबार में शेकेल 0.75% कमजोर होकर 1 डॉलर के मुकाबले 3.077 पर आ गया।

चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में अगली सरकार किसकी बनेगी और उसे बहुमत जुटाने के लिए किन पार्टियों का समर्थन लेना होगा, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

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