नई दिल्ली, एजेंसी। ITBP के DG शत्रुजीत कपूर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश में चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने आ गए थे। कई जगह टकराव की स्थिति भी बनी। यह अभी भी जारी है।
शत्रुजीत गुरुवार को राजस्थान के अलवर के सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में हिमवीर सम्मान समारोह में शामिल हुए।
उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह माना कि जुलाई के अंत से अरुणाचल प्रदेश में ऊपरी सुबनसिरी जिले के असाफिला और माजा इलाके में तनाव बना हुआ है। भारत ने भी सीमा पर अपनी तैनाती बढ़ा दी है।
गलवान रिपीट ना हो इसलिए फोकस ड्रोन फोर्स पर होना चाहिए। शत्रुजीत ने यह बयान अपने रिटायरमेंट के 7 दिन पहले दिया है। वे 31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं।
शत्रुजीत ने कहा- 3 बैठकों के बाद भी तनाव जारी
ITBP के DG ने कहा कि जुलाई से अब तक दोनों देशों के बीच तीन उच्चस्तरीय बैठकें (WMCC, विशेष प्रतिनिधि वार्ता, कोर कमांडर स्तर) हुईं, लेकिन तनाव बरकरार रहा। इसी बीच सितंबर में 18वां ब्रिक्स सम्मेलन भी हुआ, जिसमें हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे।
अरुणाचल में तनाव जारी अरुणाचल प्रदेश में कई जगह भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी और यह अब भी जारी है।
ड्रोन पर रू.1,000 करोड़ खर्च करने की तैयारी ITBP की बड़ी आधुनिकीकरण योजना में करीब रू.4,000 करोड़ की मंजूरी मिलने पर रू.1,000 करोड़ ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए रखे जाएंगे। मौजूदा रू.400 करोड़ की योजना में भी 70% राशि ड्रोन क्षमता बढ़ाने के लिए तय की गई है।
हर बॉर्डर बटालियन में ड्रोन प्लाटून ITBP ने अपनी सभी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून बनाई हैं। फोर्स ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण दे रही है और अपने ड्रोन खुद बनाने पर भी काम कर रही है।
LAC पर भूमिगत शेल्टर बनाए जा रहे आधुनिक युद्ध में जमीन के ऊपर मौजूद जवान और इमारतें आसानी से निशाना बन सकते हैं। इसलिए ITBP ने सीमा चौकियों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत भूमिगत ढांचे बनाने शुरू किए हैं, जिन्हें आगे स्थायी सुरक्षा व्यवस्था के रूप में विकसित करने की योजना है।
गलवान जैसी स्थिति से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ ट्रेनिंग ITBP ने जवानों को आधुनिक युद्ध कौशल और नई रणनीतियों का प्रशिक्षण देने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का नया कोर्स शुरू किया है। 2027 के अंत तक पूरी फोर्स को यह प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। इसके अलावा, हर बटालियन में शौर्य कमांडो टीम विकसित करने की योजना भी है।
- मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- क्या भारत की गश्त लगाने की पहुंच प्रभावित हुई है। अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है। आखिर देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है?
- कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सरकार पर इन टकरावों पर चुप रहने का आरोप लगाया। उन्होंने X पर लिखा, ‘19 जून 2020 को प्रधानमंत्री की चीन को दी गई बदनाम क्लीन चिट की कीमत भारत चुका रहा है। जब खुद को विश्वगुरु कहने वाले प्रधानमंत्री की चीन को लेकर सोची-समझी रियायतें जारी हैं।’
गलवान में 15 जून 2020 को झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे
तस्वीर लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून 2020 को भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प की है। इसी के बाद दोनों देशों के बीच विवाद गहराया।
15 जून 2020 को चीन ने ईस्टर्न लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में एक्सरसाइज के बहाने सैनिकों को जमा किया था। इसके बाद कई जगहों पर घुसपैठ की घटनाएं हुई थीं।
भारत सरकार ने भी इस इलाके में चीन के बराबर संख्या में सैनिक तैनात कर दिए थे। हालात इतने खराब हो गए कि LAC पर गोलियां चलीं।
इसी दौरान 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। बाद में भारत ने भी इसका मुंहतोड़ जवाब दिया था। इसमें करीब 60 चीनी जवान मारे गए थे।
चीन नए नाम जारी करता रहता है
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है।
इसी दावे के तहत चीन 2017 से कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी कर चुका है। 2023 में चीन ने 11 और 2024 में करीब 30 जगहों के नाम जारी किए थे। भारत हर बार इसका विरोध करता रहा है।

