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जांजगीर-चांपा : छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने की जनसुनवाई

महिला उत्पीड़न से संबंधित 28 प्रकरणों की हुई सुनवाई

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया ने आज जांजगीर-चांपा जिला पंचायत सभाकक्ष में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की जनसुनवाई की। डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर यह 410वीं तथा जिले में 12वीं जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें कुल 28 प्रकरणों की सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि मार्च माह में परिवार परामर्श केन्द्र में दोनों पक्षों के बीच सुलह हो चुकी है। दंपति का 3 वर्ष 6 माह का एक पुत्र है तथा अनावेदक वन रक्षक के पद पर कार्यरत है। वर्तमान में दोनों अलग मकान लेकर आपसी सामंजस्य से रह रहे हैं। आयोग ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद भविष्य में विवाद नहीं करने की समझाइश दी तथा प्रकरण का निराकरण करते हुए सखी प्रशासिका को दोनों पक्षों की प्रत्येक माह काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए।

एक अन्य प्रकरण में दोनों पक्ष उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अनावेदकों ने आवेदिका से माफी मांगी। उल्लेखनीय है कि 26 सितम्बर 2024 को आयोग कार्यालय में सुनवाई के दौरान आयोग के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार की घटना हुई थी, जिसकी शिकायत गोलबाजार थाने में दर्ज कराई गई थी। आयोग के समक्ष अनावेदकों ने उक्त घटना के लिए खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी। आयोग ने आवेदिका एवं उसकी सहेली को भी अनावेदकों के आपसी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की समझाइश दी और प्रकरण का निराकरण किया।

एक अन्य मामले में आवेदिका उपस्थित रही जबकि अनावेदक अनुपस्थित रहा। अनावेदक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत है। आयोग ने बताया कि पिछली सुनवाई में अनावेदक को आवेदिका एवं बच्चे का डीएनए परीक्षण कराने, उसका समस्त खर्च वहन करने तथा जांच अवधि तक प्रतिमाह 5 हजार रुपये भरण-पोषण देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। इस पर आयोग ने सखी प्रशासिका को आदेश की प्रति उपलब्ध कराते हुए दो माह के भीतर डीएनए परीक्षण कराकर रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत कराने तथा समस्त व्यय अनावेदक से वहन कराने के निर्देश दिए।

एक अन्य प्रकरण में आयोग ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच तलाक का मामला न्यायालय में लंबित है, जिसकी जानकारी आवेदिका ने आयोग से छिपाई थी। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण आयोग ने प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया।

एक अन्य मामले में आवेदिका उपस्थित रही जबकि अनावेदक अनुपस्थित था। आवेदिका मोबाइल मेडिकल यूनिट में महिला चिकित्सक के रूप में कार्यरत है तथा अनावेदक प्रोजेक्ट मैनेजर है। आयोग को बताया गया कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध महिला कर्मचारियों द्वारा संशोधित विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की जाएगी। आयोग ने सखी प्रशासिका को निर्देशित किया कि शिकायत की प्रति प्राप्त कर आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) से जांच कराने हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, शिवरीनारायण को पत्र प्रेषित किया जाए।

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