नई दिल्ली/टोक्यो, एजेंसी। जापान की अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत तेजी से बदलते सामाजिक हालातों के बीच नई रणनीतियां अपना रहे हैं। देश में लगातार घटती आबादी, बढ़ती बुजुर्ग जनसंख्या और सिकुड़ते घरेलू बाजार ने जापानी कंपनियों को विदेशी बाजारों की ओर देखने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी क्रम में भारत जापान के खाद्य और कृषि उद्योग के लिए सबसे आकर्षक बाजार बनकर उभरा है।
भारत को क्यों चुना?
जापान के कृषि, वानिकी और मत्स्य मंत्रालय (MAFF) के उपमहानिदेशक Ken Sasaji के अनुसार भारत जापानी खाद्य उत्पादों के लिए एक विशाल और संभावनाओं से भरा बाजार है। उन्होंने कहा कि भारत में सप्लाई नेटवर्क विकसित करने में समय लग सकता है, लेकिन एक बार मजबूत ढांचा तैयार हो जाने के बाद कारोबार लगातार बढ़ेगा। उनके मुताबिक भारत में केवल खाद्य उत्पाद ही नहीं बल्कि कृषि मशीनरी, कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेशन सुविधाएं, सुरक्षित परिवहन प्रणाली, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी भारी संभावनाएं मौजूद हैं।
जापान की प्रसिद्ध खाद्य प्रसंस्करण कंपनी Kagome ने 2018 में भारत में अपना कारखाना स्थापित किया था। कंपनी भारतीय किसानों से खरीदे गए टमाटरों से पिज्जा सॉस, टोमैटो सॉस अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद तैयार करती है। अब कंपनी भारत में कच्चे माल से लेकर प्रसंस्करण और वितरण तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। जापान की मशहूर सोया सॉस निर्माता कंपनी Kikkoman भारतीय बाजार को ध्यान में रखते हुए नए प्रयोग कर रही है।कंपनी यह अध्ययन कर रही है कि भारतीय व्यंजनों के साथ सोया सॉस का बेहतर मेल कैसे बैठाया जाए।
फिलहाल कंपनी विशेष रूप से भारतीय-चीनी (इंडो-चाइनीज) व्यंजनों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय बाजार में जापानी उत्पादों की स्वीकार्यता बढ़ सकती है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि भारत में निवेश बढ़ाने के लिए कुछ बुनियादी सुविधाओं का मजबूत होना जरूरी है।इनमें स्वच्छ जल की उपलब्धता, भूमि अधिकारों की स्पष्ट व्यवस्था, कर प्रोत्साहन (टैक्स इंसेंटिव), निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क शामिल हैं। जापान का मानना है कि इन क्षेत्रों में सुधार होने से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और तेज़ी से बढ़ सकता है।
भारत-जापान संबंधों को मिलेगा नया आयाम
भारत सरकार भी विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कर सुधारों और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं पर काम कर रही है। ऐसे में जापान और भारत के बीच खाद्य, कृषि और प्रसंस्करण उद्योग में सहयोग की नई संभावनाएं खुल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश मिलकर सप्लाई चेन, कृषि तकनीक और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में काम करते हैं, तो यह साझेदारी आने वाले वर्षों में अरबों डॉलर के व्यापार में बदल सकती है। घटती आबादी और सिकुड़ते घरेलू बाजार के कारण जापान अब भारत को अपने भविष्य के विकास इंजन के रूप में देख रहा है। खाद्य प्रसंस्करण, कृषि तकनीक, कोल्ड चेन और उपभोक्ता बाजार जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग न केवल जापान की कंपनियों को नया बाजार देगा, बल्कि भारत में रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा देगा।
