DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

जटराज के ग्रामीणों का आरोप: बिना बसाहट मकान ढहाने की तानाशाही, प्रशासन व एसईसीएल के खिलाफ खोला मोर्चा

4 अलग-अलग जगहों पर विस्थापित करने पर जताया ऐतराज, मूलभूत सुविधाओं की कमी

मुआवजा राशि ट्रिब्यूनल में जमा न करने और मकान ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक की मांग

कोरबा। तहसील दर्री क्षेत्र के ग्राम जटराज के ग्रामीणों ने एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के भू-अधिग्रहण और पुनर्वास नीति को लेकर कड़ा विरोध जताया है। इस संबंध में रविवार को प्रभावित भूविस्थापित जोगीराम पटेल, दिलहरण सारथी, बृजेश श्रीवास समेत अन्य ग्रामीणों ने कोरबा प्रेस क्लब के तिलक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि बिना पूर्ण बसाहट, प्लाट आबंटन और मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराए बलपूर्वक उनके मकानों को ध्वस्त कर बेदखली की कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
1978 से चल रहा अधिग्रहण, अब आनन-फानन में बेदखली
ग्रामीणों के अनुसार, एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र द्वारा ग्राम जटराज का अर्जन 4 चरणों (वर्ष 1978-79 CBA, 1983 MPLRC, 1984 MPLRC पूरक और 2010 CBA Sec 9(1)) में किया गया। पूर्व के तीन चरणों में ग्रामीणों का आवास प्रभावित नहीं हुआ था, लेकिन 2010 के अंतिम चरण के अर्जन के बाद अब 16 साल बाद (अगस्त-सितंबर 2026) आनन-फानन में गांव खाली कराने के लिए प्लाट आबंटन और मकान तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

चार अलग-अलग स्थानों पर बसाने का विरोध
प्रेस वार्ता में बताया गया कि पूरे गांव को एक साथ बसाने के बजाय चार अलग-अलग स्थानों (सर्वमंगला नगर, 14 नंबर डम्प स्थल, वैशाली नगर/खमहरिया और 14 नंबर डम्प के दूसरे छोर) पर विस्थापित किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों का सामाजिक सौहार्द, रीति-रिवाज और सामुदायिक परंपराएं प्रभावित हो रही हैं।

बसाहट स्थल पर सुविधाओं का अभाव व सुरक्षा का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि जहां प्लाट आबंटित किए जा रहे हैं, वहां पेयजल, बिजली, सड़क, नाली, मुक्तिधाम, खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। 14 नंबर डम्प स्थल स्थित प्लाट के पास पोखरी में पानी भरा है, जहां सुरक्षा बाउंड्रीवाल न होने से हादसों का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा, डम्प स्थल पर भूस्खलन की आशंका है और सामुदायिक भवन की दीवारों में अभी से दरारें आ चुकी हैं।

एकतरफा शपथ पत्र और मुआवजा राशि में गड़बड़ी का आरोप
ग्रामीणों का यह भी गंभीर आरोप है कि प्रबंधन द्वारा एकतरफा तैयार किए गए शपथ पत्र पर जबरन हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं, जिसमें मुआवजा राशि कम आंकने और भविष्य में बदलाव न करने जैसी अनुचित शर्तें शामिल हैं। जो ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें मुआवजा राशि ट्रिब्यूनल में जमा करने का डर दिखाया जा रहा है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
बिना पूर्ण बसाहट और मूलभूत सुविधाओं के मकान तोड़ने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
सभी प्रभावितों को एक ही स्थान पर सभी नागरिक सुविधाओं के साथ आबंटन दिया जाए।
बारिश के मौसम में मकान खाली कराने और 3 दिन की दी जा रही मोहलत को तुरंत रोका जाए।
मुआवजे का पारदर्शी और सही आकलन किया जाए।

Exit mobile version