कांकेर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष और कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की रायपुर सेंट्रल जेल में 4 दिसंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। फर्जी वन पट्टा बनाने के आरोप में कांकेर पुलिस ने उन्हें 12 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। लेकिन 2 दिसंबर को उन्हें रायपुर सेंट्रल शिफ्ट कर दिया गया।
परिजनों का आरोप है कि, बिना किसी सूचना के जीवन ठाकुर को रायपुर जेल ले जाया गया, जहां 2 दिन बाद उनकी मौत हो गई। रायपुर जेल में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेकाहारा में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने गुरुवार सुबह 8 बजे दम तोड़ दिया। नाराज परिजनों ने मौत के 36 घंटे बाद भी अंतिम संस्कार नहीं किया है।

विधायक सावित्री मंडावी और समाज ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, मयाना गांव के ग्रामीणों ने चारामा ब्लॉक के कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे जीवन ठाकुर पर फर्जी वन पट्टा बनाने की शिकायत की थी। जांच में यह शिकायत सही पाई गई। जिसके बाद मौजूदा तहसीलदार सत्येंद्र शुक्ला ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई।
उन्हें 12 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। प्रशासनिक कारणों से 2 दिसंबर 2025 को उन्हें कांकेर जिला जेल से रायपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था।
कांकेर सहायक जेल अधीक्षक रेणु ध्रुव मुताबिक, 4 दिसंबर की तड़के जीवन ठाकुर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जेल मेडिकल अधिकारी की सलाह पर उन्हें सुबह 4:20 बजे एम्बुलेंस से मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में सुबह 7:45 बजे उनकी जांच की गई और इलाज के दौरान गुरुवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप
परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही, जानकारी छिपाने और हत्या का आरोप लगाते हुए चारामा थाने में ज्ञापन सौंपा है। परिवार का आरोप है कि, उन्हें न तो शिफ्ट करने की जानकारी दी गई, न ही उनकी तबीयत बिगड़ने की और न ही अस्पताल में भर्ती कराए जाने की सूचना दी गई। जबकि उन्हें कोई बीमारी नहीं थी।
समाज ने की जांच की मांग
गोंडवाना समाज सामान्य समिति बस्तर संभाग के सुमेर सिंह नाग ने इस घटना को सामान्य मौत नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और संभवतः हत्या का मामला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज और परिजन तीन दिनों से थाने और अस्पताल के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन किसी ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी।
वहीं, विधायक सावित्री मंडावी ने भी बिना सूचना के रायपुर स्थानांतरित करने के आदेश की जांच की मांग की है। परिजनों और समाज ने ज्ञापन में पूरी घटना की मजिस्ट्रियल जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने, मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने, परिवार की उपस्थिति में पोस्टमॉर्टम कराने और परिवार को क्षतिपूर्ति देने की मांग की है।
आदिवासी प्रमुखों ने दी आंदोलन की चेतावनी
आदिवासी प्रतिनिधि सुमेर सिंह नाग, कन्हैया उसेंडी, गौतम कुंजाम और तुषार ठाकुर ने कहा कि, अगर इस मामले की सही जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
सर्व आदिवासी समाज ने मांग की है कि गृह विभाग 7 दिनों के अंदर इस घटना की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाए। ऐसा न होने पर वे जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।
