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15 जून को जन आक्रोश रैली के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी किसान सभा: छोटे खातेदारों को रोजगार देने, अधिग्रहित जमीन की वापसी, रोजगार व पुनर्वास की मांग

रैली में शामिल होंगे लोकसभा सांसद अमराराम

आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर और पर्चे जारी किया भू विस्थापितों ने

कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा तथा भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में छोटे खातेदारों को रोजगार देने, भूविस्थापितों के लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण, जमीन वापसी,पट्टा, आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाने, पेयजल की व्यवस्था करने, बसावट एवं खनन प्रभावित गांवों की अन्य समस्याओं को लेकर 15 जून को जन आक्रोश रैली निकालकर कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा की है। जिला प्रशासन को रैली और प्रदर्शन के संबंध में ज्ञापन भी सौंपा गया है। जिला प्रशासन से भी कई बार हस्तक्षेप कर समस्याओं के समाधान की मांग की गई, लेकिन प्रशासन ने समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, इसलिए विस्थापितों ने किसान सभा के नेतृत्व में अब आर की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव गांव में बैठक कर पर्चे वितरण के साथ भू विस्थापितों को एकजुट भी किया जा रहा है और किसान सभा ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर भी जारी किया है। कलेक्ट्रेट घेराव और जन आक्रोश रैली को लेकर भू विस्थापितों के साथ आम जनता का भी व्यापक जन समर्थन मिल रहा है।

माकपा के लोकसभा सांसद और किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड अमराराम कोरबा जिले के विस्थापितों की समस्या को सुनने ओर समझने के लिए जनआक्रोश रैली में शामिल होने के लिए कोरबा आ रहे हैं और कोरबा कलेक्टर से मिलकर भू विस्थापितों के समस्याओं के समाधान की मांग करेंगे साथ ही कोरबा जिले के भू विस्थापितों के साथ हो रहे शोषण, अन्याय के खिलाफ लोकसभा तक भू विस्थापितों की आवाज को पहुंचाएंगे।

कलेक्ट्रेट घेराव को सफल बनाने के लिए 8 जून से 14 जून तक गांव गांव में नुक्कड़ सभा,घर घर पर्चे वितरण एवं भू विस्थापितों को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया है।

किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के कुसमुंडा,गेवरा,दीपका,कोरबा सभी क्षेत्रों में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भू विस्थापितों के लंबित रोजगार,जमीन वापसी,पट्टा,बसावट एवं प्रभावित गांव की मूलभुत समस्याओं के निराकार के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है, जिससे भू विस्थापितों के सब्र का बांध टूट चुका है। एसईसीएल के अधिकारियों का ध्यान केवल भू विस्थापितों के अधिकारों को छीन कर, आपस में लड़वाकर केवल कोयला उत्पादन को बढ़ाने और उच्च अधिकारियों को खुश करने की है, जिसमें जिला प्रशासन भी एसईसीएल के साथ खड़ी है प्रबंधन और प्रशासन पहले एकजुट था अब सभी क्षेत्रों के भू विस्थापित अपने अधिकार को लेने के लिए एकजुट हो रहे है। किसानों की जमीन का अधिग्रहण जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है और उद्योगों को जमीन नियमों के पालन के तहत सौंपा जाता है, लेकिन उद्योग जमीन तो ले लेती है, लेकिन विस्थापित जमीन अधिग्रहण के बाद रोजगार और पुनर्वास के लिए भटकते हैं। जिला प्रशासन की विस्थापित किसानों के अधिकार को दिलाने के लिए भी सामने आना चाहिए।

किसान सभा नेता जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू, जय कौशिक,पवन यादव,अमरजीत कंवर आदि ने भू-विस्थापितों की समस्याओं के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन दोनों को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कुसमुंडा में जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर 1000 दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा है और समस्याओं की ओर कई बार प्रशासन और प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन भू-विस्थापितों की समस्याओं के निराकरण के प्रति कोई भी गंभीर नहीं है।
कुसमुंडा में तहसीलदार की उपस्तिथि में दो माह पहले कलेक्टर स्तर पर बैठक कर समस्याओं के समाधान का आश्वाशन दिया गया लेकिन दो माह में जिला प्रशासन को कभी समय नहीं मिला।

भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष रेशम यादव, सचिव दामोदर श्याम ने कहा कि जिनकी जमीन एसईसीएल ने ली है, उन्हें बिना किसी शर्त के रोजगार दिया जाये क्योंकि जमीन ही उनके जीने का एकमात्र सहारा थी। आज भूविस्थापित भुखमरी के कगार पर खड़े है छोटे बड़े खातेदार के नाम पर किसानों को बांटने का काम बंद किया जाए। 15 जून को चारों क्षेत्र से पूरे परिवार सहित हजारों भू-विस्थापित कलेक्ट्रेट घेराव में शामिल होंगे।

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