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कोरबा भिलाईबाजार के तहसीलदार भगत के बेटे को कलेक्टर के गनमेन ने मारा थप्पड़

0 तहसीलदार बंदे राम भगत सारंगढ़ कोतवाली के सामने धरने पर:कलेक्टर के गनमैन पर बेटे से मारपीट का आरोप, FIR होने के बाद अनशन खत्म

सारंगढ़-बिलाईगढ़/ कोरबा। भाजपा के सुशासन में अधिकारियों को आमरण अनशन पर बैठना पड़ रहा है। दरअसल कोरबा जिले के दीपका एवं भिलाईबाजार में पदस्थ तहसीलदार बंदेराम भगत के पुत्र को सारंगगढ़ – बिलाईगढ़ के कलेक्टर के गनमेन ने थप्पड़ जड़ दिया। श्री भगत, गनमेन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने सिटी कोतवाली पहुंचे, लेकिन पुलिस ने कलेक्टर के गनमेन के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की और बाद में श्री भगत आमरण अनशन पर बैठ गए। आमरण अनशन में बैठने के कुछ देर बाद कलेक्टर के गनमेन के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया और श्री भगत ने आमरण अनशन खत्म किया।
यहां यह बताना लाजिमी होगा कि तहसीलदार जैसे अधिकारी को न्याय के लिए आमरण अनशन पर बैठना पड़ रहा है। भाजपा के सुशासन में अधिकारियों का यह हाल है, तो आम आदमी का क्या हाल होगा? यह इस घटना से साफ जाहिर हो रहा है।

जिले में कोरबा में पदस्थ तहसीलदार बंदे राम भगत सिटी कोतवाली थाने के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए। उनका आरोप है कि 20 जनवरी को उनके बेटे राहुल भगत के साथ सारंगढ़ बिलाईगढ़ के कलेक्टर के गनमैन ने मारपीट की और गालीगलौज की थी।

इस मामले में सिटी कोतवाली पुलिस ने कलेक्टर के गनमैन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। तहसीलदार बंदे राम भगत ने बताया कि मारपीट के कारण उनके बेटे के कान का पर्दा फट गया है। इसके बावजूद पुलिस मामले में कार्रवाई करने से बच रही है और उन्हें टालमटोल जवाब दे रही है। वहीं, FIR दर्ज होने के बाद तहसीलदार ने आमरण अनशन को समाप्त कर दिया।

तहसीलदार की कॉल पर सिर्फ गोलमोल जवाब

उन्होंने आरोप लगाया कि वह दोपहर 3 बजे से सिटी कोतवाली थाने में बैठे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्हें गोलमोल जवाब दिए जा रहे हैं और फाइल को इधर-उधर किया जा रहा है। तहसीलदार ने थाना प्रभारी को 8-10 बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया। एक बार बड़ी मुश्किल से कॉल उठाने पर भी उन्हें गोलमोल जवाब मिला।

जांच अधिकारी से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विरोध जताया

इसके बाद उन्होंने जांच अधिकारी से मुलाकात की, जिन्होंने बताया कि फाइल आरक्षक को दी गई है। आरक्षक से पूछने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिसके बाद तहसीलदार आक्रोशित होकर आमरण अनशन पर बैठ गए।

तहसीलदार ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं होती और उन्हें उसकी प्रति नहीं मिलती, तब तक वह आमरण अनशन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि वह न एक बूंद पानी पिएंगे और न ही अन्न ग्रहण करेंगे। इस घटना के बाद से थाने में हड़कंप मच गया है और आला अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई है।

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