कोरबा। एसईसीएल के चिरमिरी क्षेत्र अंतर्गत कोरबा जिले में पड़ने वाले रानी अटारी एवं विजय वेस्ट भूमिगत खदान में आउट सोर्सिंग कंपनी जेएमएस द्वारा 32 मजदूरों को बिना नोटिस दिए खनन कार्य से निकाले जाने पर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। इस आक्रोश को स्वर दिया है अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ किसान सभा ने। किसान सभा के राज्य अध्यक्ष प्रशांत झा ने इन मजदूरों को काम पर रखे जाने के साथ ही, इन मजदूरों को निकाले जाने की अवधि की मजदूरी देने की भी मांग की है।

उल्लेखनीय है कि रानी अटारी कोयला खदान में खनन प्रभावित गांवों के किसान ठेका मजदूर के रूप में काम करते हैं। इनमें से अधिकांश आदिवासी छोटे किसान परिवार से आते हैं, खदान में होने वाले सभी कार्यों में प्रभावित क्षेत्र के प्रभावितों को नियमित और स्थाई रोजगार देने की जिम्मेदारी एसईसीएल की है। एसईसीएल अपनी यह जिम्मेदारी तो पूरा कर ही नहीं रहा है बल्कि ठेका मजदूरों के रूप में काम कर रहे किसानों को रोजगार की सुरक्षा देने से भी इंकार कर रहा है, जबकि इन ठेका मजदूरों का सेवायोजक एसईसीएल ही है।
हड़ताल से पूर्व प्रबंधन और किसान सभा नेताओं के बीच हुई वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला, जिसके बाद 13 अक्टूबर को किसान सभा ने खदान बंद का आह्वान किया है। वार्ता में प्रबंधन की ओर से सब एरिया मैनेजर सौरभ कुमार, नंद किशोर मीणा, राहुल बंसोड, सी एस जोशिया तथा किसान सभा की ओर से प्रशांत झा, दामोदर श्याम, बृजलाल, रामेश्वर समेत कई ठेका श्रमिक शामिल थे। खदान बंदी में खनन प्रभावित गांवों के किसानों के भी भारी संख्या में शामिल होने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने आरोप लगाया है कि पूरे एसईसीएल क्षेत्र में आउटसोर्सिंग कंपनियां किसानों और मजदूरों का बेरहमी से शोषण कर रही है और एसईसीएल प्रबंधन की इन कंपनियों के साथ पूरी मिलीभगत है।
किसान सभा के कोरबा जिला सचिव दीपक साहू ने कहा है कि एक तरफ तो केंद्र सरकार नए लेबर कोड का कड़ाई से पालन कराने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कंपनी एसईसीएल में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। इसलिए खदान बंद होने तथा आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना और कानून-व्यवस्था की स्थिति या वित्तीय नुकसान की संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
मांगें
- आउट सोर्सिंग कंपनी जेएमएस द्वारा काम से निकाले गए सभी 32 कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया जाए एवं बैठाए गए दिनों की भी मजदूरी दी जाए।
- जिन प्रभावितों का वीटीसी कराया गया है, उन्हें तत्काल खदान में काम उपलब्ध कराया जाएं।
