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व्यक्तिगत लक्ष्य निर्धारण के लिए बच्चों को छोड़ दें स्वतंत्र

Divya Akash

अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर और कामयाब इंसान बनाने के लिए बचपन से ही उन पर पूरा फोकस करे। बचपन से ही उन्हें अच्छा करने के लिए प्रेरित करें। प्राथमिक कक्षा में एडमिशन के साथ ही पुस्तकीय ज्ञान के साथ लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना सीखाएं। छोटी-छोटी बातों में आगे चलकर बड़ा संदेश निकलता है। जैसे खाना खाते समय यदि उसके छोटे दोस्त घर पर पहुंचते हैं, तो उन्हें भी साथ में बैठने के लिए पैरेंट्स बच्चों को समझाएं, इससे लोगों के प्रति बच्चे का प्रेम बढ़ेगा और सामुदायिक जीवन जीने के लिए प्रेरित होगा। इसके अलावा भाई-बहनों के साथ कुछ समय के लिए गपशप करने दें, एक साथ भाई-बहनों, दोस्तों के साथ खेलने दें, आसपास घूमने दें, पढ़ाई करने दें। इस तरह का माहौल मिलने से बच्चे सामुदायिक जीवन को अपनाएंगे और मन में सद्भाव बढ़ेगा।
अच्छी पढ़ाई के साथ बच्चे को सफल इंसान तो बना सकते हैं, लेकिन बेहतर इंसान बनाने के लिए अभिभावकों को भी बच्चों के सामने एक आदर्श पैरेंट्स की भूमिका निभानी होगी। पैरेंट्स को भी सामुदायिक एवं रचनात्मक कार्यों में लगा देख कर बच्चे भी अपने अभिभावक से सीखेंगे कि परिवार के साथ-साथ दूसरों को लाभ पहुंचाने के लिए किस तरह कार्य किया जा सकता है। यह ध्यान रहे कि बच्चों का रोल मॉडल उसके अपने माता-पिता ही होते हैं। समाज में आपकी जिस तरह से एक्टिविटी होगी, वैसा ही बालक सीखेगा।
लक्ष्य निर्धारण के लिए स्वतंत्र छोड़ दें
जब बालक किशोरवय अवस्था में पहुंचता है और मीडिल-हाई स्कूल में एंट्री करता है तो वह अपना अच्छा व बुरा समझने लगता है और उसके मन में ब्याकुलता आती है कि वह आगे चलकर क्या बनेगा? किस क्षेत्र में वह अपना कैरियर बनाएगा। लक्ष्य निर्धारण के लिए पैरेंट्स अपने बच्चों पर ज्यादा दबाव न डालें और उन्हें लक्ष्य निर्धारण के लिए स्वतंत्र छोड़ दें। इस बात पर अभिभावक जरूर ध्यान दें कि बचपन से अब तक बच्चे को किस विषय पर रूचि है और उस विषय को लेकर पैरेंट्स अपने बच्चों का प्रोत्साहन बढ़ाएं, ताकि बच्चों को लक्ष्य निर्धारण के लिए ऊहापोह की स्थिति निर्मित न हो और वह आसानी से अपने रूचिकर विषय की ओर आगे बढ़ सके और इसी विषय को लेकर वह अपना कैरियर गढऩे के लिए स्वतंत्र मस्तिष्क से लक्ष्य निर्धारण कर सके। आप बच्चों को लक्ष्य निर्धारिण के लिए स्वतंत्र छोड़ दें और आप देखेंगे कि बच्चा किस तरह से अपने कैरियर के प्रति गंभीर होकर आगे बढ़ रहा है।
समूह में रहना सिखाएं
आज भौतिक युग में एकल परिवार की संख्या बढ़ती जा रही है और इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। एकल परिवार में अधिकतर माता-पिता नौकरी पेशा वाले होते हैं और अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते, जिसके कारण बच्चे उद्दण्ड और गलत संगति में पडक़र भटकाव की स्थिति में आ जाते हैं और उनका कैरियर बर्बाद हो जाता है। यदि आप एकल परिवार में जी रहे हैं, तो भी बच्चों के लिए समय अवश्य निकालें और रिश्तेदारों के साथ घुलमिलकर रहना सिखाएं। सामुदायिक जीवन से बच्चों का मानसिक स्थिति बेहतर बनती है।

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