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शराब घोटाला केस…चैतन्य के खिलाफ 7000 पन्नों का चालान पेश:4 बंडल दस्तावेज लेकर आई ED, EOW-ACB की गिरफ्तारी का डर, हाईकोर्ट से अग्रिम-जमानत खारिज

रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ ED ने आज रायपुर कोर्ट में 7 हजार पन्नों से ज्यादा का चालान पेश किया है। ED के अधिकारी 4 बंडल दस्तावेज लेकर कोर्ट पहुंचे थे। वहीं चैतन्य की रिमांड के लिए EOW-ACB ने भी कोर्ट में आवेदन लगाया है।

EOW-ACB ने चैतन्य से पूछताछ के लिए 7 दिन की रिमांड मांगी है, लेकिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कल यानी मंगलवार को फिर से सुनवाई होगी। माना जा रहा है कि अब EOW-ACB की भी टीम भी घोटाले को ले कर पूछताछ कर जांच करेगी।

वहीं ACB-EOW की गिरफ्तारी से बचने के लिए चैतन्य बघेल ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट से याचिका खारिज हो गई है। सरकार की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा ने अग्रिम जमानत का विरोध किया।

एडिशनल एडवोकेट ने कोर्ट से कहा कि ACB की स्पेशल कोर्ट के बजाए सीधे हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई है, इसलिए सुनवाई नहीं होनी चाहिए। चैतन्य बघेल की ओर से एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने पैरवी की। सुनवाई के बाद जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी है।

इसके अलावा चैतन्य बघेल की कस्टोडियल रिमांड खत्म होने पर जेल के अधिकारियों ने कोर्ट में पेश किया। चैतन्य के खिलाफ शराब घोटाला, कोल लेवी, महादेव सट्टा ऐप और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच चल रही है। चैतन्य बघेल की 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तारी हुई थी, तब से रायपुर जेल में बंद है।

चैतन्य बघेल के खिलाफ ED ने आज रायपुर कोर्ट में 7 हजार पन्नों से ज्यादा का चालान पेश किया है।

चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले- ED

दरअसल, शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया।

ED के मुताबिक चैतन्य बघेल ने ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया है। साथ ही सिंडिकेट के साथ मिलकर 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई है।

पिछली सुनवाई के दौरान चैतन्य से मुलाकात करने पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी कोर्ट पहुंचे थे।

चैतन्य के प्रोजेक्ट में 13-15 करोड़ इन्वेस्ट

ED ने अपनी जांच में पाया कि, चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले के पैसे को इन्वेस्ट किया गया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर ED ने रिकॉर्ड जब्त किए थे।

प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था। जबकि रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ ही दिखाया गया। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से पता चला कि, बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया, जो रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया।

ED रिमांड खत्म होने के बाद चैतन्य को आज रायपुर स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा।

फर्जी फ्लैट खरीदी के जरिए पैसे की हेराफेरी

ED ने अपनी जांच में पाया है कि त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किए। ढिल्लन ने ये फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे लेकिन पेमेंट त्रिलोक ढिल्लो ने खुद दिया।

ED ने जब ढिल्लन के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कर्मचारियों ने बताया कि, ये फ्लैट की खरीदी उन्हीं के नाम पर हुई, लेकिन पैसे ढिल्लो ने दिए। ये सारा ट्रांजेक्शन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन हुआ।

ED ने कहा कि ब्लैक को लीगल करने के लिए यह एक पूर्व-योजना के तहत किया गया लेन-देन था। इसका मकसद पैसे को छिपाकर चैतन्य बघेल तक पहुंचाना था।

5 करोड़ कैश के बदले फर्जी ट्रांसफर

ED के मुताबिक भिलाई के एक ज्वेलर्स ने चैतन्य बघेल को 5 करोड़ रुपए उधार दिए, लेकिन ED की जांच में सामने आया कि जो 5 करोड़ रुपए चैतन्य की दो कंपनियों को लोन के रूप में दिया गया ।

बाद में इसी ज्वेलर्स ने बघेल की कंपनी से 6 प्लॉट खरीदे, जिसकी कीमत 80 लाख थी। ED ने बताया कि यह पैसा शराब घोटाले से आया हुआ कैश था। यह पैसा बैंक के जरिए ट्रांसफर किया गया। ताकि कैश को लीगल दिखाया जा सके।

पैसा छुपाने के लिए फ्रंट कंपनियों का इस्तेमाल

ED का दावा है कि चैतन्य बघेल ने घोटाले का पैसा पाने के लिए दूसरे लोगों और कंपनियों का इस्तेमाल किया ताकि ED और अन्य एजेंसियां ट्रैक न कर सकें।

जैसे ढिल्लन सिटी मॉल में पैसा आया, फिर ढिल्लन ड्रिंक्स से कर्मचारियों को पैसा ट्रांसफर हुआ, फिर वही पैसा बघेल डेवलपर्स को दिया गया। ED का दावा है कि चैतन्य बघेल के पास 16.70 करोड़ के अवैध घोटाले के पैसे आए।

अब जानिए चैतन्य बघेल तक कैसे पहुंची ED ?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वकील सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले का जो इन्वेस्टिगेशन चल रहा था उसमें एविडेंस मिले हैं, जिसमें चैतन्य बघेल ने बहुत सारे पैसे को लेयरिंग की है। 1000 करोड़ का लेनदेन किया है। पप्पू बंसल ने अपने बयान में खुलासा किया है।

शराब के घोटालों के पैसों को चैनलाइज्ड करके चैतन्य बघेल तक पहुंचाया जाता था। लिकर स्कैम का पैसा अनवर ढेबर के जरिए दीपेंद्र चावड़ा फिर वह पैसा केके श्रीवास्तव और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल औ उसके बाद चैतन्य बघेल के पास यह पैसा पहुंचता था।

सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले में जिन लोगों का इन्वॉल्वमेंट है उन लोगों के आपस में कनेक्शन है। अनवर ढेबर से मोबाइल चैट और रिकॉर्डिंग मिली है। चैतन्य बघेल तक पैसा पहुंचाया गया है।

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने चैतन्य की गिरफ्तारी को सही नहीं ठहराया है।

पूर्व सीएम के बेटे इसलिए हुई गिरफ्तारी

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने बताया था कि पप्पू बंसल के बयान को आधार मानते हुए चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की गई है जो सही नहीं है। पप्पू बंसल के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट है और वह बाहर घूम रहे हैं। किसके दबाव में उन्होंने इस तरह का बयान दिया है यह आप समझ सकते हैं।

रिजवी ने कहा था कि 2022 से शराब घोटाले मामले में जांच चल रही है, और आज चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी तक एक भी समन चैतन्य बघेल को नहीं दिया गया है। मार्च में जब उनके घर में रेड की गई थी तब उनके सभी डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए थे। जो डॉक्यूमेंट एजेंसी ने मांगी थी, उन्हें सभी डॉक्यूमेंट को चैतन्य के जरिए दिया गया है।

वकील ने कहा था कि ED की जांच में चैतन्य बघेल ने लगातार सपोर्ट किया है, जांच में भी शामिल हुए हैं लेकिन एक बार भी उनका बयान नहीं लिया गया। सीधे उनकी अरेस्टिंग की गई है। कानून को ताक पर रखकर चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया है, उनका अपराध सिर्फ यही है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं।

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