DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

महतारी वंदन योजना ने बदल दी अनिता बाई की जिंदगी

कोरबा। जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत जटगा के आश्रित ग्राम बांधापारा में रहने वाली अनिता बाई का जीवन कभी बहुत संघर्षों से भरा था। तीन बच्चों की माँ अनिता बाई के लिए महीने में एक हजार रुपये जुटा पाना भी बेहद कठिन होता था। गांव में काम-धंधे की उपलब्धता कम होने के कारण वह अपने परिवार का गुज़ारा मुख्य रूप से जंगल से मिलने वाले चरोटा बीज और अन्य वनोपजों को इकट्ठा कर बेचकर करती थीं। चरोटा बीज वे बाजार में 25 रुपये किलो में बेचती हैं, इसके अलावा अन्य वनोपज भी बेचती है। जिससे परिवार का खर्च बड़ी मुश्किल से चलता था।

इसी बीच छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना से उनका नाम जुड़ गया, और यहीं से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई। योजना के तहत मिलने वाली महीने की एक हजार रुपये की सहायता राशि उनके लिए आर्थिक संबल बन गई। अनिता बाई बताती हैं कि गाँव में जहां छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी रुपये जुटाना कठिन था, वहीं योजना से मिलने वाली यह राशि घर के आवश्यक खर्चों को पूरा करने में बड़ी मदद करती है।
आंगन में चरोटा बीज साफ करते हुए अनिता बाई मुस्कुराकर कहती हैं इसका हमेशा डिमांड रहता है, इसे बेचकर थोड़ी आमदनी हो जाती है, लेकिन महतारी वंदन का पैसा मिलने से घर चलाना अब पहले की तरह मुश्किल नहीं रहा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हम जैसी महिलाओं के लिए सच में बड़ा सहारा दिया है।
अनिता बाई ही नहीं, उनके पति राम सिंह भी इस परिवर्तन को महसूस करते हैं। वे बताते हैं कि अब छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उन्हें अलग से पैसा नहीं देना पड़ता और घर में आर्थिक तनाव कम हुआ है। साथ ही वे खुशी जाहिर करते हुए बताते हैं कि उनका पीएम आवास भी स्वीकृत हो चुका है, और पक्का घर बनने का काम जारी है। आने वाले समय में उन्हें अपना खुद का मजबूत और सुरक्षित घर मिलने की उम्मीद है।
वनोपज संग्रह, चरोटा बिक्री और सरकारी योजनाओं के सहयोग से अनिता बाई आज अपने परिवार को बेहतर भविष्य देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। महतारी वंदन योजना ने न सिर्फ उन्हें आर्थिक सहारा दिया, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई राह भी दिखाई है।

Exit mobile version