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जल संसाधन विभाग की टेंडर शर्तों में बड़ा बदलाव

10 साल से कम अनुभव वाले ठेकेदारों को नहीं मिलेगा डैम-नहर निर्माण का काम

रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग ने टेंडर की शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब 5 साल की बजाय 10 साल के अनुभव वाले ठेकेदारों को ही काम दिया जाएगा। विभाग ने ठेकेदारों के लिए समान कार्य की नई परिभाषा तय की है। इसके तहत केवल वही ठेकेदार पात्र होंगे, जिनके पास वास्तव में सिंचाई एवं जल संरचना से जुड़े तकनीकी कार्यों का अनुभव होगा।

नए नियमों में साफ किया गया है कि सड़क, भवन या पुल निर्माण का अनुभव अब डैम, नहर या सिंचाई परियोजनाओं के लिए मान्य नहीं होगा। इस फैसले का असर आने वाले समय में हसदेव, इंद्रावती, केलो, महानदी बेसिन, बैराज, स्टॉप डैम, नहर और यूजीपीएल योजनाओं पर पड़ेगा।

पांच साल के अनुभव वाले ठेकेदार कम इसलिए बदला नियम

बताया गया है कि टेंडर में कठोर चट्टान की खुदाई, नहरों में सीमेंट कंक्रीट लाइनिंग, डायाफ्राम वॉल का निर्माण, मिट्टी के बांध और नहर पटरी, पडल वर्क (सीपेज रोकने की परत), बांधों पर पत्थर की पिचिंग, रेडियल गेट, स्टॉप लॉग और गैंट्री क्रेन जैसे गेट सिस्टम, भूमिगत पाइपलाइन – ह्यूम पाइप एवं अन्य सिंचाई पाइप के कामों में पांच साल अनुभव रखने वाले बहुत कम ठेकेदार बचे हैं।

प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण किसी भी ठेकेदार को काम दे दिया जा रहा था, इसलिए पांच साल के अनुभव को बढ़ाकर दस साल कर दिया गया है। अफसरों के मुताबिक अब ज्यादा ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे।

अनुभवहीन ठेकेदारों से गुणवत्ता पर प्रभाव

बताया गया है कि अब तक कई बार ऐसा हुआ कि सड़क या भवन निर्माण का अनुभव रखने वाले ठेकेदारों को डैम और नहरों के ठेके मिल गए। इसका नतीजा यह हुआ कि नहरों में लीकेज, बांधों की कमजोरी, गेट सिस्टम में खराबी और भारी वित्तीय नुकसान सामने आया। नए नियमों से केवल तकनीकी रूप से दक्ष और अनुभवी एजेंसियां ही काम कर सकेंगी।

खुदाई, कंक्रीट, गेट के लिए अलग-अलग रेटिंग

बताया गया है कि केवल उन्हीं ठेकेदारों को टेंडर में पात्र माना जाएगा, जिनके पुराने कार्यों में ये आइटम वास्तविक रूप से शामिल रहे हों। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब ठेकेदार का अनुभव आइटम-वार वेटेज प्रणाली से आंका जाएगा। मतलब, खुदाई, कंक्रीट, गेट, पाइपलाइन और पिचिंग जैसे प्रत्येक कार्य को अलग-अलग अंक मिलेंगे। यदि कुल वेटेज तय सीमा तक नहीं पहुंचा, तो ठेकेदार अयोग्य माना जाएगा।

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