नई दिल्ली/कोलकाता, एजेंसी। बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से 18 दिन पहले चुनाव आयोग ने TMC के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं।
ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न मिला है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ दिया गया है।
इससे एक दिन पहले आयोग ने दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाला मूल चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था। यह अंतरिम व्यवस्था है। मूल नाम और चिह्न पर अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।
अब दोनों गुट उपचुनाव में नई पार्टी नाम और सिंबल से चुनाव लड़ेंगे। नंदीग्राम और रेजीनगर पर 6 अक्टूबर को वोटिंग हैं और रिजल्ट 9 अक्टूबर को आएगा।
ममता बोलीं- चुनाव आयोग कैसे मेरी पार्टी का सिंबल फ्रीज कर सकता है
चुनाव आयोग के फैसले पर ममता ने कहा- EC मेरी पार्टी का वह चुनाव चिह्न कैसे फ्रीज कर सकता है जो 28 साल से हमारे पास है। ना तो हम सिर झुकाएंगे और ना ही हार मानेंगे; हम लड़ेंगे और वापसी करेंगे।TMC के बागी BJP की ‘A-टीम’ हैं; जो लोग हमारे चुनाव चिह्न पर चुने गए थे, वे ही अब इसे चुनौती दे रहे हैं।
TMC के दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवार उतार चुके
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC धड़े से मोहम्मद एतेशामुल हक नंदीग्राम और सफीउद्दीन शेख रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे।
वहीं, पूर्व सीएम ममता बनर्जी की TMC ने रविवार को नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार घोषित किया था। हालांकि संचिता ने शुक्रवार को अपना नाम वापस ले लिया।
ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 19 सांसद बचे
टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से दो सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 11 राज्यसभा सांसद बचे हैं।
विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीतीं थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं।
