DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

मंत्री बोलीं- टोलकर्मी को पीए नहीं ड्राइवर ने थप्पड़ मारे:लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा- चालक को चेतावनी दी, कर्मचारी से जल्द मिलकर जानूंगी हाल-चाल

अंबिकापुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में लहपटरा टोल प्लाजा पर टोलकर्मी से मारपीट मामले में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मारपीट उनके PA ओम प्रकाश राजवाड़े ने नहीं, बल्कि वाहन चालक ने की थी।

मंत्री ने ड्राइवर को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि टोल बूम गिरना मानवीय या तकनीकी गलती हो सकती है, लेकिन कर्मचारी से दुर्व्यवहार करना गलत है। घटना के समय वह गाड़ी में आराम कर रही थीं और उन्हें इसकी जानकारी अगले दिन सोशल मीडिया से मिली।

दरअसल, 2 सितंबर की रात मंत्री का काफिला लहपटरा टोल प्लाजा से गुजर रहा था। पहली गाड़ी टोल पार कर गई, जबकि दूसरी गाड़ी पर टोल बूम गिर गया। इसके बाद ड्राइवर टोलकर्मी के पास पहुंचा और उसे 5 थप्पड़ जड़ दिए।

इस दौरान टोलकर्मी हाथ जोड़कर माफी मांगता रहा। पूरी घटना CCTV में रिकॉर्ड हुई थी। अगले दिन टोलकर्मी महेंद्र राजवाड़े ग्रामीणों के साथ लखनपुर थाने पहुंचा और शिकायत की थी। मंत्री ने कहा कि वह जल्द कर्मचारी से मिलकर उसका हाल-चाल जानेंगी।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की गाड़ी में टोल बैरियर का बूम गिर गया।

गुस्साए मंत्री के ड्राइवर ने टोल कर्मचारी से जमकर मारपीट की।

टोल कर्मचारी को तड़ातड़ 5 थप्पड़ जड़े।

मंत्री बोलीं- घटना के वक्त गाड़ी में थीं

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि घटना के वक्त वह दिनभर के सरकारी कार्यक्रमों के बाद गाड़ी में आराम कर रही थीं। गाड़ी के अंदर होने के कारण उन्हें मौके पर हुई घटना की जानकारी नहीं थी। अगले दिन सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से घटना की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने पर उन्हें काफी दुख हुआ।

PA ने नहीं, ड्राइवर ने की मारपीट

मंत्री ने कहा कि उनके PA ओम प्रकाश राजवाड़े ने टोलकर्मी से कोई मारपीट या दुर्व्यवहार नहीं किया। उन्होंने PA का नाम इस मामले में जोड़े जाने को गलत और भ्रामक बताया। मंत्री के मुताबिक, वीडियो में टोलकर्मी से मारपीट करता दिखाई दे रहा व्यक्ति वाहन चालक है। उन्होंने ड्राइवर को कड़ी चेतावनी दिए जाने की बात कही है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, बुधवार (2 सितंबर) की रात करीब साढ़े 12 बजे मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बिलासपुर से अंबिकापुर की ओर आ रही थीं। उनके काफिले में दो गाड़ियां थीं। सबसे आगे चल रही इनोवा ने लहपटरा टोल बैरियर पार किया। इसके तुरंत बाद मंत्री की फॉर्च्यूनर टोल बैरियर से गुजर रही थी। इसी दौरान अचानक बैरियर का बूम फॉर्च्यूनर के ऊपर गिर गया।

ड्राइवर ने जड़े थप्पड़, गार्ड ने किया बचाव

हादसे के बाद मंत्री के काफिले की दोनों गाड़ियां रुक गईं। घटना से तमतमाए मंत्री का ड्राइवर सुरक्षाकर्मियों के साथ नीचे उतरा और नाके पर पहुंचा। ड्राइवर ने टोल कर्मी महेंद्र राजवाड़े के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट कर दी।

माफी मांगता रहा टोलकर्मी

इस दौरान महेंद्र राजवाड़े माफी मांगता रहा, लेकिन मंत्री के ड्राइवर ने कई थप्पड़ जड़ दिए। सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोका और उसे वापस गाड़ी में लेकर आए। इस घटनाक्रम के दौरान मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपनी गाड़ी से नहीं उतरीं, वो अंदर ही बैठी रहीं।

टोल कर्मचारी हाथ जोड़कर माफी मंगता रहा।

मारपीट की घटना CCTV में रिकॉर्ड हुई है।

FIR दर्ज कराने थाने पहुंचे टोलकर्मी, आंदोलन की चेतावनी

घटना के दूसरे दिन गुरुवार (3 सितंबर) को टोलकर्मी महेंद्र राजवाड़े अपने बाकी कर्मचारियों के साथ थाने पहुंचा। उसने मारपीट की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उसका एमएलसी करा लिया है।

महेंद्र राजवाड़े के साथ थाने पहुंचे लोगों ने कहा कि, अगर पुलिस FIR नहीं करती है तो लहपटरा के ग्रामीण आंदोलन करेंगे। गुरुवार शाम तक पुलिस ने मामले में FIR दर्ज नहीं की थी।

पीड़ित और ग्रामीणों ने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की बात कही।

फॉलो वाहन नहीं था, इसलिए गिरा बूम

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की गाड़ी पर बूम गिरने का कारण फॉलो वाहन नहीं होना बताया जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद मंत्री ने अपना काफिला घटा दिया है और फॉलो वाहन हटा दिया गया है।

मंत्री की गाड़ी के सामने चल रही इनोवा वाहन टोल से गुजरी तो नियमानुसार टोल बूम नीचे आ गया। फॉलो वाहन होता तो कर्मी टोल बूम को उठा देते। फॉलो वाहन नहीं था तो वे यह नहीं समझ सके कि काफिला मंत्री का है।

इस कारण आगे की गाड़ी के क्रॉस होते ही टोल मैकेनिज्म ने बूम को नीचे कर दिया और मंत्री की फॉर्च्यूनर कार पर टोल बूम गिर गया। इससे मंत्री की गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई। इस मामले में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी है।

गुरुवार सुबह थाने पहुंचे थे ग्रामीण।

Exit mobile version