रायपुर,एजेंसी। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने रायपुर के ग्राम नकटी की सार्वजनिक उपयोग (चारागाह) भूमि को विधायक कॉलोनी के लिए आवंटित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ हो सकता है।
मोहम्मद अकबर ने कहा कि 10 मार्च 2011 को प्रमुख सचिव, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी कलेक्टरों और संभागायुक्तों को पत्र जारी किया था। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 24 जनवरी 2011 के फैसले के पालन में जारी हुआ था।
सार्वजनिक जमीन सुरक्षित रखने के थे निर्देश
सरकारी आदेश में कहा गया था कि सार्वजनिक उपयोग की जमीनों की सूची बनाई जाए, उन्हें चिन्हित कर सुरक्षित रखा जाए और भविष्य में ऐसी जमीन किसी दूसरे काम के लिए आवंटित न की जाए।

नकटी की चारागाह भूमि पर चल रही प्रक्रिया
अकबर ने कहा कि 4 अक्टूबर 2024 को आवास एवं पर्यावरण विभाग के निर्देश के बाद रायपुर कलेक्टर की ओर से नकटी की चारागाह भूमि को हाउसिंग बोर्ड को देने की प्रक्रिया चल रही है। उनके अनुसार, यदि ऐसा होता है तो यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला बन सकता है। हालांकि, अवमानना हुई है या नहीं, इसका फैसला अदालत ही करेगी।
छत्तीसगढ़ में अब तक नहीं हुई अवमानना की सजा
उन्होंने कहा कि साल 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद अब तक न्यायालय की अवमानना के किसी मामले में किसी अधिकारी को सजा नहीं हुई है। राज्य बनने से पहले जबलपुर हाईकोर्ट ने रायपुर के संयुक्त पंजीयक सहकारिता को 15 दिन की सजा सुनाई थी।
अधिकारियों की कार्रवाई पर जताई हैरानी
मोहम्मद अकबर ने कहा कि 2011 का सरकारी आदेश आज भी लागू है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा नकटी की चारागाह भूमि खाली कराकर हाउसिंग बोर्ड को सौंपने की तैयारी की जा रही है, जो हैरानी की बात है।
