
पाली छिदपारा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया हलषष्ठी पर्व
पाली छिदपारा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर बुधवार, 2 सितंबर 2026 को पाली छिदपारा में हलषष्ठी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शिव मंदिर हनुमान के पास प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी माताओं ने अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखा।इस अवसर पर माताओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर हलषष्ठी माता की कथा का श्रवण किया।
व्रत कथा का वाचन सुशील पांडेय जी (केराझरिया वाले महाराज) ने किया। कथा के दौरान हलषष्ठी व्रत के धार्मिक महत्व और इसकी परंपराओं के बारे में जानकारी दी गई।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। इसी कारण इस दिन माताओं द्वारा पुत्रों की दीर्घायु और उनके मंगलमय जीवन के लिए व्रत रखने की परंपरा है।हलषष्ठी व्रत में हल से जुते हुए खेत में उगे अनाज या सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता।
प्राकृतिक आहार के रूप में तालाब में स्वयं उगने वाले तिन्नी या पसई के चावल, महुआ तथा भैंस के दूध-दही का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं इस दिन गाय के दूध और घी का सेवन वर्जित माना जाता है।पर्व के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर परिवार और विशेषकर अपने पुत्रों की दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।